भिंड जिले में खाद्य सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले डेयरी कारोबारियों पर प्रशासन का शिकंजा कसता जा रहा है। खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता में गड़बड़ी और बिना वैध दस्तावेजों के कारोबार चलाने के मामलों में प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाते हुए छह डेयरी संचालकों पर कुल 22 लाख रुपए का जुर्माना ठोका है।
प्रयोगशाला जांच में फेल हुए नमूने
जांच के दौरान विभिन्न डेयरियों से लिए गए दूध, घी और मावा के नमूनों को परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेजा गया था। रिपोर्ट में कई नमूने अमानक पाए गए, जो आम जनजीवन के स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकते थे। इसके अलावा, कई प्रतिष्ठान बिना किसी अनिवार्य खाद्य पंजीयन या लाइसेंस के संचालित होते पाए गए।
मेहगांव रोड पर मिला अमानक दूध और टैंकर
कार्रवाई के दौरान मेहगांव के अमायन रोड पर निरीक्षण में एक टैंकर के अंदर लगभग 2 हजार लीटर मिश्रित दूध पकड़ा गया था। जब इसकी जांच कराई गई तो यह अमानक श्रेणी का निकला और खास बात यह रही कि संबंधित कारोबारी के पास इसके लिए कोई वैध खाद्य लाइसेंस भी मौजूद नहीं था।
इसी मामले के तहत श्री गणेश डेयरी के संचालक श्रीकृष्ण राठौर पर अमानक दूध बेचने के लिए 3 लाख रुपए और बिना लाइसेंस कारोबार संचालित करने के एवज में 4 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया। इस प्रकार इस एक ही प्रकरण में कुल 7 लाख रुपए का अर्थदंड तय किया गया।
राशि न चुकाने पर होगी भू-राजस्व जैसी वसूली
खाद्य सुरक्षा प्रशासन के अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि जिन छह कारोबारियों पर कुल 22 लाख रुपए का जुर्माना लगाया गया है, उन्हें तय समय सीमा के भीतर यह राशि जमा करनी होगी। यदि निर्धारित अवधि में अर्थदंड की राशि जमा नहीं की जाती है, तो खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम की धारा 96 के प्रावधानों के तहत भू-राजस्व की बकाया राशि की तर्ज पर सख्त वसूली की जाएगी।
प्रशासन ने अंचल के सभी खाद्य एवं डेयरी कारोबारियों को सख्त चेतावनी दी है कि मिलावटखोरी या बिना लाइसेंस के कारोबार करने वालों के खिलाफ भविष्य में भी इसी तरह की औचक निरीक्षण और दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!