ग्वालियर-चंबल आंचल के भिंड जिले में एक ऐसा अनूठा देवी मंदिर स्थित है, जहाँ करीब 1500 साल पुरानी परंपरा आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है। इस मंदिर में माता की मूल प्रतिमा एक कुंड के भीतर विराजी हुई है, लेकिन स्थानीय लोगों का मानना है कि आज तक किसी ने भी उनके मुख के दर्शन नहीं किए हैं।
चार जिलों की सीमा और बीहड़ों का इतिहास
जिला मुख्यालय से लगभग 80 किलोमीटर की दूरी पर पहूज नदी के बीहड़ों के बीच यह पवित्र स्थल बसा हुआ है। भौगोलिक स्थिति के लिहाज से यह जगह चार जिलों की सीमाओं से घिरी है। यह भिंड जिले के अंतर्गत जरूर आता है, लेकिन यहाँ से थोड़ी ही दूरी पर उत्तर प्रदेश की सीमा शुरू हो जाती है। इसके अलावा, मध्य प्रदेश का दतिया और उत्तर प्रदेश के जालौन तथा झाँसी जिले की सीमाएं भी इसी इलाके से सटी हुई हैं।
बीहड़ का यह इलाका कभी कुख्यात डकैतों की शरणस्थली हुआ करता था। फूलन देवी, मलखान सिंह, लुक्का और नब्बे के दशक के चर्चित बागी हरीसिंह कुशवाह जैसे नाम इस क्षेत्र से जुड़े रहे हैं। बुजुर्गों का कहना है कि उस दौर में भी डकैत माता के प्रति अगाध श्रद्धा रखते थे और वे कभी मंदिर परिसर के अंदर उत्पाद नहीं मचाते थे।
गाय की मौत से जुड़ी है 1500 साल पुरानी कथा
मंदिर के अतीत को लेकर स्थानीय स्तर पर एक प्रचलित कथा सुनाई जाती है। कहा जाता है कि लगभग 1500 साल पहले एक गाय रोज बीहड़ में बने चबूतरे पर एक पत्थर की प्रतिमा के ऊपर अपना सारा दूध अर्पित कर देती थी। जब पशुपालक ने इस रहस्य को जानने के लिए गाय का पीछा किया और घटना देखकर गुस्से में आकर कुल्हाड़ी से वार किया, तो गाय की मौके पर ही मौत हो गई।
इस घटना के तुरंत बाद चमत्कारी रूप से माता की प्रतिमा उलट गई। उसी समय से प्रतिमा का मुख नीचे की ओर छिप गया और किसी को उसके दर्शन नहीं हुए। तभी से यहाँ आने वाले भक्तगण केवल पीठ की ही पूजा करते आ रहे हैं।
कुंड में पानी भरने के बाद अब ऊपर से होती है पूजा
पहले के समय में भक्त सीढ़ियों का उपयोग करके कुंड के अंदर उतरते थे और मूल प्रतिमा के पास जाकर पुष्प अर्पित करते थे। हालांकि, पिछले कुछ वर्षों से कुंड में पानी भरा रहने के कारण अब बाहर से ही आराधना की जाती है। करीब पाँच साल पहले कुंड के ऊपरी हिस्से में एक अन्य प्रतिमा की स्थापना भी की गई है। इसके साथ ही परिसर में माँ आदिशक्ति शीतला माता की प्राचीन प्रतिमा भी स्थापित है, जिससे यहाँ तीन अलग-अलग रूपों की पूजा की जाती है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!