भिंड जिले में सामने आए नर्सिंग ऑफिसर स्नेहलता हत्याकांड में लगातार नए और सनसनीखेज खुलासे हो रहे हैं। बिहार की रहने वाली मृतका को शायद इस बात की भनक तक नहीं थी कि जिस शख्स को उसने जीवनसाथी माना और जिसके साथ वह लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही थी, वही उसकी जान का दुश्मन बन जाएगा। दोनों का 10 महीने का एक बेटा भी है जिसका नाम बाबुआ है।

परिवार के सामने ही छोड़ गई थी मासूम को

पुलिसिया तफ्तीश में यह बात सामने आई है कि आरोपी सत्यप्रकाश की मां और उसकी पहली पत्नी दोनों ही इस रिश्ते से वाकिफ थीं। मृतका स्नेहलता सत्यप्रकाश के घर पर सभी के साथ सामान्य व्यवहार करती थी। वह आरोपी की मां को सास मानती थी और उसकी पहली पत्नी को दीदी कहकर संबोधित करती थी। जब भी स्नेहलता को रात्रि ड्यूटी पर जाना होता था, वह अपने 10 महीने के बच्चे को सत्यप्रकाश की मां और पहली पत्नी के पास सुरक्षित छोड़ जाती थी। यही कारण है कि घटना वाले दिन यानी 8 अक्टूबर को भी उसने बच्चे को उनके सुपुर्द करते वक्त किसी खतरे की आशंका नहीं जताई थी।

कानपुर ले जाने का झांसा देकर दिया वारदात को अंजाम

पुलिस के अनुसार 8 अक्टूबर की शाम सत्यप्रकाश अपने साथी राजवीर खन्ना और अन्य दोस्तों के साथ कार लेकर पहुंचा था। उसने स्नेहलता से कॉलेज के प्रचार-प्रसार और एडमिशन के सिलसिले में कानपुर चलने को कहा। भरोसे में आकर वह उसके साथ जाने के लिए तैयार हो गई। आरोप है कि रास्ते में गला घोंटकर उसकी हत्या कर दी गई और शव को पचनदा इलाके में ठिकाने लगा दिया गया। पुलिस अब इस पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी हुई है।

बच्चे की सुरक्षा को लेकर नाना ने जताई चिंता

घटना के बाद मृतका के पिता संजय पांडेय ने अपने 10 महीने के नाती बाबुआ की सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता जाहिर की थी। नाना की आशंका को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मासूम को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के सुपुर्द कर दिया। शनिवार को बच्चे को समिति के समक्ष पेश किया गया। अब सीडब्ल्यूसी यह तय करेगी कि बच्चे को उसके नाना-नानी को सौंपा जाए या सत्यप्रकाश के परिवार के पास रखा जाए।

शव की तलाश के लिए एसडीआरएफ और एनडीआरएफ की मदद

भिंड पुलिस उत्तर प्रदेश के इटावा और जालौन प्रशासन के सहयोग से पचनदा व आसपास के जलीय क्षेत्रों में स्नेहलता के शव की तलाश कर रही है। शनिवार को यमुना नदी में एक अन्य महिला का शव मिला था, जिसकी शिनाख्त स्नेहलता के रूप में नहीं होने पर उसका अंतिम संस्कार करा दिया गया। अब पुलिस ने विशेष उपकरणों और एनडीआरएफ-एसडीआरएफ टीमों की मदद से अगले तीन दिनों तक सर्च अभियान को और तेज करने का निर्णय लिया है। इस मामले में चार आरोपियों को नामजद किया गया है जबकि अन्य की तलाश जारी है।