शरद पूर्णिमा पर करीला धाम में आस्था का महासंगम
रविवार को शरद पूर्णिमा के अवसर पर प्रसिद्ध सिद्ध पीठ करीला धाम में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिली। अलसुबह से ही माता जानकी के दर्शन और पूजन के लिए भक्तों का तांता लग गया था, जो देर शाम तक लगातार जारी रहा। दूर-दराज के इलाकों से पहुंचे हजारों श्रद्धालुओं ने माता के दरबार में मत् टेककर अपने परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की।
महर्षि वाल्मीकि की तपोभूमि और राई नृत्य की परंपरा
यह स्थान महर्षि वाल्मीकि की पावन तपोभूमि के रूप में विख्यात है, जहां माता जानकी अपने पुत्रों लव और कुश के साथ विराजमान हैं। इस क्षेत्र के लोगों की माता जानकी के प्रति अगाध श्रद्धा है। ऐसी मान्यता है कि माता जानकी राई नृत्य से बेहद प्रसन्न होती हैं, जिसके चलते मन्नत पूरी होने पर भक्त यहां नृत्यांगनाओं से राई नृत्य करवाते हैं।
रविवार को करीला धाम का पूरा मंदिर परिसर पारंपरिक ढोल-नगाड़ों की थाप और राई नृत्य की गूंज से सराबोर नजर आया। मन्नत पूरी होने पर पहुंचे श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से अनुष्ठान पूरे किए।
विभिन्न माध्यमों से पहुंचे श्रद्धालु
पूर्णिमा के खास अवसर पर करीला धाम की ओर जाने वाले सभी मार्गों पर दिनभर भक्तों का आना-जाना लगा रहा। श्रद्धालु बस, चार पहिया वाहन, ऑटो और दोपहिया वाहनों से करीला पहुंचे। इसके अलावा, आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोग हाथों में माता की चुनरी और पूजन सामग्री लेकर पैदल यात्रा करते हुए दरबार में हाजिरी लगाने पहुंचे।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!