अशोकनगर जिले के पिपरई क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले प्याऊ ठाना में इन दिनों संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन किया जा रहा है। कथा के दौरान व्यासपीठ से प्रख्यात कथावाचक बिहारी विदुर जी ने भगवान श्रीकृष्ण की विभिन्न बाल लीलाओं का बहुत ही भावपूर्ण और सजीव वर्णन किया।
भगवान श्रीकृष्ण ने दी प्रकृति के पूजन की प्रेरणा
कथा के दौरान गोवर्धन धारण की कथा सुनाते हुए व्यास जी ने बताया कि द्वापर युग में जब ब्रजवासी देवराज इंद्र की पूजा की तैयारी कर रहे थे, तब बाल कृष्ण ने उन्हें रोककर समझाया था। भगवान ने ब्रजवासियों को बताया कि हमें उस प्रकृति का पूजन और सम्मान करना चाहिए, जिससे हमें जीवन के लिए जरूरी अन्न, जल और आश्रय मिलता है। उन्होंने सभी को गोवर्धन पर्वत और गौ माता के महत्व से अवगत कराते हुए गोवर्धन पूजा करने के लिए प्रेरित किया।
इंद्र का मानमर्दन कर सात दिन तक उठाया गोवर्धन पर्वत
बाल कृष्ण के कहने पर ब्रजवासियों ने इंद्र पूजा के स्थान पर गोवर्धन पर्वत की पूजा शुरू कर दी। इस बात से कुपित होकर देवराज इंद्र ने ब्रज में मूसलाधार बारिश शुरू कर दी जिससे चारों तरफ पानी भर गया और लोग डर गए। ऐसी विकट स्थिति में भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी कनिष्ठ उंगली पर विशाल गोवर्धन पर्वत को उठा लिया और सभी ब्रजवासियों को उसके नीचे शरण दी। भगवान ने लगातार सात दिनों तक पर्वत को उठाए रखकर ब्रजवासियों की रक्षा की।
आज के समय में भी अत्यधिक प्रासंगिक है संदेश
कथावाचक ने श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए कहा कि गोवर्धन लीला सिर्फ भगवान के चमत्कारों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें पर्यावरण और प्रकृति संरक्षण का बहुत बड़ा संदेश निहित है। पर्वत, वन, नदियां, गौवंश और अन्य प्राकृतिक संसाधन मानव अस्तित्व का मूल आधार हैं, इसलिए इनकी रक्षा करना हम सबका दायित्व है।
उन्होंने आगे कहा कि पूतना मोक्ष जहां अधर्म और बुराई के खात्मे का प्रतीक है, वहीं गोवर्धन पूजा हमें प्रकृति के प्रति कृतज्ञ रहने की सीख देती है। आज के दौर में जब पर्यावरण पर लगातार दबाव बढ़ रहा है, श्रीकृष्ण के ये विचार समाज के लिए और अधिक महत्वपूर्ण हो गए हैं। इस दौरान कथा पंडाल में श्रीकृष्ण के जयकारों से पूरा माहौल भक्तिमय हो गया और श्रद्धालु भावविभोर दिखाई दिए।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!