अशोकनगर जिले के मुंगावली क्षेत्र में दिगंबर जैन समाज का दशलक्षण महापर्व पूरी आस्था, भक्ति और उल्लास के माहौल में संपन्न हुआ। पर्व के समापन के बाद रविवार को क्षमावाणी पर्व श्रद्धापूर्वक मनाया गया, जिसमें बड़ी संख्या में श्रावक और समाजजन शामिल हुए।
आपसी गिले-शिकवे भुलाकर मांगी उत्तम क्षमा
क्षमावाणी के इस पवित्र अवसर पर लोगों ने एक-दूसरे के सामने हाथ जोड़कर जाने-अनजाने में हुई गलतियों और भूलों के लिए उत्तम क्षमा मांगी। इस दौरान केवल जैन समाज ही नहीं, बल्कि समाज के अन्य वर्गों के लोग भी आपसी गिले-शिकवे भुलाकर एक-दूसरे के गले मिले और भाईचारे का संदेश दिया।
मोबाइल और इंटरनेट के इस दौर में सोशल मीडिया पर भी पूरे दिन क्षमावाणी पर्व की बधाइयों और शुभकामना संदेशों का तांता लगा रहा। लोगों ने एक-दूसरे को संदेश भेजकर क्षमादान की इस परंपरा को आगे बढ़ाया।
बच्चों और युवाओं ने की कठिन धर्म साधना
दशलक्षण पर्व के पावन दिनों में नगर के कई धर्मप्रेमियों ने दस उपवास यानी मासखमण की कठिन तपस्या और साधना की। वहीं, अनंत चतुर्दशी और पर्व के समापन अवसर पर बड़ी संख्या में छोटे-छोटे बच्चों ने भी निर्जला उपवास रखकर अपनी धार्मिक निष्ठा की अनूठी मिसाल पेश की।
संत निवास परिसर में इस दौरान सामूहिक शांतिनाथ विधान का भव्य आयोजन किया गया। इस धार्मिक अनुष्ठान के दौरान एक विशेष क्षण तब आया जब शांतिधारा का शुद्ध वाचन एक छोटे बालक सानिध्य सराफ द्वारा किया गया।
नन्हें बालक के मंत्रोच्चार से अचंभित हुए श्रद्धालु
बालक सानिध्य सराफ ने जिस स्पष्टता, लयबद्धता और शुद्ध उच्चारण के साथ संस्कृत के कठिन श्लोकों और मंत्रों का वाचन किया, उसने वहां मौजूद सभी श्रद्धालुओं को आश्चर्यचकित कर दिया।
इस अवसर पर समाज के अध्यक्ष रूपेश जैन ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि आचार्य श्री विद्यासागर जी महाराज और मुनि श्री सुधासागर जी महाराज की पावन प्रेरणा का ही प्रभाव है कि आज के बच्चे नियमित रूप से पाठशाला जाकर धार्मिक संस्कार ग्रहण कर रहे हैं और विभिन्न मंचों के माध्यम से धर्म की प्रभावना कर रहे हैं।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!