कलेक्ट्रेट गेट पर दिया धरना
अशोकनगर जिले के पिपरई इलाके में जमीनी विवाद और अतिक्रमण से जुड़े मामलों को लेकर गुरुवार को दो अलग-अलग परिवारों ने जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय के मुख्य द्वार पर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान दोनों दंपतियों ने गेट पर अनिश्चितकालीन हड़ताल का बैनर भी तान दिया, जिस पर स्थानीय नेताओं और दबंगों द्वारा प्रताड़ित करने तथा जमीनों पर जबरन कब्जा करने के गंभीर आरोप लिखे गए थे।
पहला मामला: न्यायालय के स्थगन के बावजूद निर्माण का आरोप
पहले मामले में 71 वर्षीय बुजुर्ग विमल कुमार जैन ने आरोप लगाया कि सर्वे नंबर 661 की शामिलाती जमीन पर ब्रजभान सिंह और गौतम सिंह समेत अन्य लोग अवैध निर्माण कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस जमीन का विवाद अदालत में विचाराधीन है और न्यायालय से स्थगन आदेश भी प्राप्त है, इसके बावजूद निर्माण कार्य जारी है। धरने की भनक लगते ही पिपरई तहसीलदार रोहित रघुवंशी मौके पर पहुंचे। उन्होंने वीडियो कॉल के जरिए घटनास्थल की स्थिति दिखाकर स्पष्ट किया कि फिलहाल वहां कोई निर्माण नहीं हो रहा है और साथ ही जमीन से कब्जा हटवाने का भरोसा दिलाया।
दूसरा मामला: तार फेंसिंग कर रास्ता और खेत का आगे का हिस्सा रोकने का दावा
वहीं दूसरे मामले में सलीम अजीज और अनसार हारून ने सर्वे नंबर 227 की जमीन पर लंबे समय से अपना आधिपत्य होने का दावा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि फारूक खां, इश्तयाक खां, असफाक खां और आफाक खां ने तार फेंसिंग कर उनकी जमीन का अगला हिस्सा कब्जा लिया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि स्थानीय सांसद प्रतिनिधि लाखन कटारिया के करीबी इस पूरे कृत्य में शामिल हैं। पीड़ितों के मुताबिक इस बारे में कई बार शिकायत की जा चुकी है और केंद्रीय मंत्री सिंधिया के कार्यालय से भी समाधान पत्र आ चुका है, लेकिन जमीनी स्तर पर राहत नहीं मिली।
प्रशासन ने दिए जांच और कार्रवाई के निर्देश
दोनों पक्षों की शिकायतें सुनने के बाद तहसीलदार रोहित रघुवंशी ने आश्वासन दिया कि सभी बिदुंओं पर बारीकी से जांच की जाएगी। प्रशासन ने दोनों ही मामलों में वैधानिक प्रक्रिया अपनाते हुए अवैध कब्जे को शीघ्र हटवाने की बात कही है, जिसके बाद धरने पर बैठे परिवारों को शांत कराया गया।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!