साइंस ऑफ फॉरगिवनेस विषय पर विशेष चर्चा

अशोकनगर शहर में चातुर्मास कर रहे मुनिश्री निरंजन सागर जी महाराज के सान्निध्य में शनिवार को साइंस ऑफ लिविंग का विशेष सत्र आयोजित किया गया। इस सत्र का मुख्य विषय 'साइंस ऑफ फॉरगिवनेस' रखा गया था, जिस पर विस्तार से मंथन किया गया।

दूसरों की भूलों को दरकिनार करना ही क्षमा का सार

मुनिश्री ने अपने संबोधन में फरमाया कि क्षमा का असली मतलब हर जीव और आत्मा को एक समान समझना है। इसके साथ ही दूसरों की गलतियों को नजरअंदाज कर केवल उनके गुणों पर गौर करना चाहिए। उन्होंने बताया कि क्षमा अंतःकरण का वह बड़ा गुण है, जिसके जरिए सामने वाले व्यक्ति के मन की मैल और शत्रुता हमारे पवित्र आचरण से खुद-ब-खुद खत्म हो जाती है। भटके हुए इंसान को सही राह पर लौटने का मौका देना ही असल में क्षमाभाव कहलाता है।

क्षमावाणी पर्व और दशलक्षण पर्व का समापन

दशलक्षण यानी पर्युषण पर्व के आखिरी दिन शनिवार की सुबह गंज मंदिर परिसर में क्षमावाणी पर्व पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। इस दौरान दिगंबर जैन पंचायत समिति के पदाधिकारी, कई सामाजिक संगठनों के नुमाइंदे और बड़ी संख्या में स्थानीय जैन समाज के लोग मौजूद रहे।

कार्यक्रम में मौजूद सभी लोगों ने एक-दूसरे के गले मिलकर और हाथ जोड़कर सालभर में अनजाने में हुई गलतियों के लिए 'उत्तम क्षमा' मांगी और एक-दूसरे को बड़े दिल से माफ किया। प्रत्यक्ष रूप से मिलने के अलावा फोन और सोशल मीडिया के जरिए भी परिचितों और रिश्तेदारों से क्षमा मांगने और देने का सिलसिला पूरे दिन चलता रहा।