गर्भवती महिलाओं को मिली बड़ी राहत

अशोकनगर जिला अस्पताल में सोनोग्राफी जांच के लिए लंबे समय से परेशान हो रही गर्भवती महिलाओं के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। मीडिया में व्यवस्थाओं की पोल खुलने के बाद शासन और प्रशासन हरकत में आए और तुरंत प्रभाव से अस्पताल की स्वास्थ्य सेवाओं में व्यापक बदलाव किए गए।

पूर्व में जिला अस्पताल में सोनोग्राफी की सुविधा सप्ताह में केवल दो दिन ही मिल पाती थी, जिसके कारण महिलाओं को पंद्रह-पंद्रह दिनों तक की वेटिंग का सामना करना पड़ता था। अब इस व्यवस्था में सुधार करते हुए इसे सोमवार से शनिवार यानी पूरे छह दिन नियमित रूप से संचालित करने के आदेश दिए गए हैं।

अस्पताल परिसर में बढ़ाए गए बुनियादी इंतजाम

अस्पताल परिसर में आने वाली गर्भवती महिलाओं और उनके परिजनों की कठिनाइयों को देखते हुए प्रशासनिक स्तर पर त्वरित इंतजाम किए गए हैं। फर्श पर बैठने को विवश महिलाओं के लिए अब पच्चीस नई कुर्सियां लगवाई गई हैं, साथ ही उनके बैठने के लिए शेड और पीने के लिए ठंडे पानी की व्यवस्था भी सुनिश्चित कर दी गई है।

जिला पंचायत सीईओ द्वारा कराई गई शुरुआती जांच में यह बात सामने आई कि एक अक्टूबर को ही अस्पताल में उनसठ गर्भवती महिलाओं ने सोनोग्राफी के लिए पंजीकरण कराया था, जबकि अठारह निजी मरीज भी जांच के लिए पहुंचे थे। इस दौरान मरीजों और उनके तीमारदारों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा था।

केंद्रीय मंत्री के निर्देश पर प्रशासनिक कार्रवाई

इस पूरे मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए केंद्रीय संचार मंत्री एवं स्थानीय सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया ने त्वरित हस्तक्षेप किया और प्रशासनिक अधिकारियों को व्यवस्थाएं सुधारने के कड़े निर्देश दिए। केंद्रीय मंत्री के निर्देश मिलने के बाद ग्वालियर संभाग के क्षेत्रीय संचालक स्वास्थ्य सेवाएं ने मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) डॉ. अलका त्रिवेदी को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है।

नोटिस में यह स्पष्ट किया गया है कि बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के संविदा चिकित्सक डॉ. आस्था अग्रवाल को उनकी मूल संस्था वापस भेजे जाने से सोनोग्राफी सेवाएं पूरी तरह ठप हो गईं थीं और विभाग की छवि धूमिल हुई।

स्वास्थ्य विभाग के क्षेत्रीय कार्यालय द्वारा जारी इस नोटिस में चेतावनी दी गई है कि यदि तीन दिवस के भीतर इस बदइंतजामी और समूची स्थिति पर लिखित स्पष्टीकरण प्रस्तुत नहीं किया गया, तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।