प्रशासनिक व्यवस्था की लापरवाही से उजड़ा हंसता-खेलता परिवार
सरकारी तंत्र की उदासीनता किस तरह एक परिवार को पूरी तरह तबाह कर सकती है, इसकी एक बानगी चंदेरी क्षेत्र से सामने आई है। अफसरों की मनमानी और लंबे समय से रुका हुआ वेतन मिलने के कारण एक शिक्षक का परिवार गंभीर आर्थिक संकट और भुखमरी के कगार पर पहुंच गया है। हालात इस कदर बिगड़ गए कि समय पर इलाज न मिलने के कारण शिक्षक को एक ही साल के भीतर अपने माता और पिता दोनों को गंवाना पड़ा।
निलंबन और प्रतिनियुक्ति का विवाद बना प्रताड़ना की वजह
यह पूरा मामला शासकीय माध्यमिक विद्यालय मोहरी में गणित के पद पर कार्यरत शिक्षक अशोक कुमार ओझा से जुड़ा हुआ है। विभागीय उपेक्षा से आहत होकर उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि आगामी 16 नवंबर 2026 तक उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे चंदेरी के दिल्ली दरवाजा या अशोकनगर में कोई ekstrem कदम उठाने को विवश होंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। घटना की शुरुआत 14 नवंबर 2025 को हुई थी, जब तत्कालीन कलेक्टर द्वारा प्राथमिक विद्यालय चक जार्सल की आंगनबाड़ी का निरीक्षण किया गया था। वहां नाश्ता बनते देखे जाने के बाद 16 नवंबर को शिक्षक ओझा को निलंबित कर दिया गया था। शिक्षक का कहना है कि उनकी प्रतिनियुक्ति पहले ही समाप्त हो चुकी थी और नए आदेश भी जारी हो चुके थे, फिर भी उन्हें साजिश के तहत मामले में फंसाया गया।
वेतन रुकने से नहीं हो सका माता-पिता का इलाज
जनवरी 2026 के अंत में दो वेतन वृद्धियां रोकते हुए शिक्षक को बहाल तो कर दिया गया, लेकिन असली मुश्किलें इसके बाद शुरू हुईं। पोर्टल पर मैपिंग न होने और सर्विस बुक की फाइलें गायब होने का हवाला देकर उनका वेतन महीनों तक रोक लिया गया। पैसों की कमी के कारण ओझा अपने बीमार माता-पिता का इलाज नहीं करा पाए। परिणामस्वरूप, 12 जनवरी 2026 को उनकी माता का निधन हो गया और 6 जून 2026 को ब्रेन ट्यूमर व पैरालिसिस से पीड़ित उनके रिटायर्ड प्राचार्य पिता ने भी दम तोड़ दिया।
अधिकारियों का पक्ष
इस पूरे प्रकरण पर चंदेरी के बीईओ राजेश तिवारी का कहना है कि कलेक्टर द्वारा रोकी गई दो वेतन वृद्धियों की बहाली उन्हीं के स्तर से संभव है, जबकि निलंबन अवधि का वेतन बीआरसी कार्यालय से जारी होना है। उन्होंने बताया कि उन्होंने हाल ही में पदभार संभाला है और मामले से जुड़ी पुरानी फाइलों को मंगवाकर वरिष्ठ अधिकारियों के मार्गदर्शन में जल्द से जल्द उचित समाधान निकाला जाएगा।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!