कागजों में योजना, जमीन पर चूल्हे का धुआं
शासन की ओर से स्कूलों और आंगनवाड़ियों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए मध्यान्ह भोजन योजना के तहत गैस कनेक्शन उपलब्ध कराए गए हैं ताकि बच्चों का खाना स्वच्छ माहौल में और बिना धुएं के तैयार हो सके। हालांकि, मैदानी हकीकत इन दावों से कोसों दूर नजर आ रही है। जिले के कई शिक्षण संस्थानों में गैस कनेक्शन होने के बावजूद नियमित रूप से सिलेंडर रिफिल न होने के कारण एक बार फिर लकड़ी और उपलों के चूल्हे जलने लगे हैं।
कोलुआ और जमाखेड़ी स्कूलों की पड़ताल
स्थिति का जायजा लेने के लिए जब विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन बनने के समय पड़ताल की गई तो अलग ही तस्वीर सामने आई। शासकीय माध्यमिक स्कूल कोलुआ में गैस पर सब्जी तो बनती मिली, लेकिन साथ ही चूल्हे पर रोटियां भी सेंकी जा रही थीं। स्कूल की शिक्षिका सीमा कुशवाह का कहना है कि बच्चों की संख्या अधिक होने के कारण समय बचाने के लिए चूल्हे का उपयोग किया जाता है। वहीं शासकीय स्कूल जमाखेड़ी में तो हालात और भी ज्यादा चिंताजनक मिले, जहां पूरा मध्यान्ह भोजन ही चूल्हे के धुएं के बीच तैयार किया जा रहा था।
सिलेंडर के लिए भटक रहे स्व-सहायता समूह
भोजन तैयार करने वाले स्व-सहायता समूहों के सामने सबसे बड़ी बाधा समय पर गैस सिलेंडर का न मिलना बनी हुई है। समूह संचालकों का कहना है कि जब वे सिलेंडर लेने एजेंसी पहुंचते हैं तो उन्हें खाली हाथ लौटा दिया जाता है। जमाखेड़ी स्कूल की समूह अध्यक्ष कलाबाई ने बताया कि वे पिछले तीन दिनों से लगातार ऑटो से सिलेंडर रिफिल कराने जा रही हैं, लेकिन हर बार उन्हें निराश होकर लौटना पड़ रहा है, जिससे रोज ऑटो का किराया भी जेब से जा रहा है।
पिछले कुछ समय से गैस सिलेंडर की समस्या चल रही है। लेकिन स्कूलों के लिए प्राथमिकता से सिलेंडर उपलब्ध कराने के लिए खाद्य विभाग ने एजेंसियों को निर्देशित कर रखा है। जहां समस्या है, वहां पर निरीक्षण कर समाधान कराया जाएगा। - राहुल शर्मा, डीपीसी, अशोकनगर






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!