धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया विजयादशमी पर्व
पिपरई नगर में विजयादशमी का पावन पर्व पूरी श्रद्धा, परंपरा और भक्तिभाव के साथ हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। इस खास अवसर पर मां बीजासन का पारंपरिक डोला निकाला गया, जिसे देखने और आशीर्वाद पाने के लिए नगर के साथ-साथ आसपास के ग्रामीण इलाकों से भी भारी संख्या में लोग पहुंचे। मां बीजासन की यह डोला यात्रा क्षेत्र की प्राचीन और अनूठी सांस्कृतिक परंपराओं में एक विशेष स्थान रखती है।
मंदिर से शुरू होकर प्रमुख मार्गों से गुजरा डोला
पारंपरिक डोले की शुरुआत स्थानीय बीजासन मंदिर से विधिवत पूजा-अर्चना के बाद हुई। यहां से यात्रा नगर के मुख्य मार्गों से होते हुए चौधरी साहब की हवेली और राय साहब के दरवाजे तक पहुंची। इस दौरान स्थानीय निवासी अपने घरों के बाहर खड़े होकर माता के डोले का इंतजार करते नजर आए और श्रद्धा के साथ अपनी भेंट अर्पित की।
मान्यता के अनुसार इस दौरान श्रद्धालु नारियल, आटा और दाल जैसी वस्तुएं माता को भेंट करते हैं। नगर के विभिन्न समुदायों के लोगों ने इस आयोजन में सक्रिय रूप से भाग लिया। यह परंपरा पिपरई की सामाजिक समरसता और सांस्कृतिक पहचान का एक अनूठा उदाहरण पेश करती है।
भेंट स्वीकार करने द्वार तक पहुंचती हैं माता
स्थानीय लोगों में यह अटूट विश्वास है कि जो भी श्रद्धालु सच्चे मन और पूरी निष्ठा के साथ माता के लिए भेंट तैयार रखता है, मां बीजासन का डोला खुद चलकर उनके द्वार तक पहुंचता है। इसी गहरी आस्था के चलते विजयादशमी के दिन कई परिवार अपने घरों के बाहर थाली सजाकर माता के आगमन की प्रतीक्षा करते दिखाई दिए।
क्षेत्र के लोगों के लिए यह आयोजन महज एक धार्मिक यात्रा नहीं है, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही निष्ठा और परंपरा का जीवंत प्रतीक है, जो सभी को आपस में जोड़ता है।
थाना परिसर में पहुंचा डोला और बदला नजारा
इस डोला यात्रा का सबसे खास और रोचक पल थाना परिसर के पास देखने को मिला। पुरानी परंपरा के अनुसार, जब मां का डोला थाने के मुख्य द्वार पर पहुंचा, तब थाना प्रभारी को खुद बाहर आकर डोले की अगवानी करनी पड़ी। प्रभारी की अगवानी के बाद ही डोले ने थाना परिसर के अंदर प्रवेश किया, जिसे देखने के लिए बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!