अशोकनगर के वृद्धाश्रम में अपनों के छल की दास्तान

जिंदगी के अंतिम पड़ाव पर जहां अपनों के सहारे की जरूरत होती है, वहीं संपत्ति के लालच और परिवार की बेरुखी ने कई बुजुर्गों को वृद्धाश्रम की चार दीवारों के भीतर ला खड़ा किया है। अंतर्राष्ट्रीय वृद्धजन दिवस के अवसर पर अशोकनगर जिले के वृद्धाश्रम का यह सच दिल दहला देने वाला है। यहां कुल 23 बुजुर्ग आश्रय लिए हुए हैं, जिनमें सबसे अधिक 12 माताएं शामिल हैं। जरा-जरा सी जमीन और जायदाद के लालच में अपनों द्वारा किए गए छलावों ने इनकी आंखों में केवल आंसू और गहरा दर्द छोड़ दिया है।

भजन-कीर्तन से बहलाते हैं मन, बेटियों का साथ देता है ढांढस

अपनों के सताए ये बुजुर्ग अब वृद्धाश्रम में ही एक-दूसरे के सुख-दुख के साथी बन गए हैं। हालांकि अपनों ने उन्हें बिसरा दिया है, लेकिन कुछेक बेटियों का हालचाल जानने आना इन माताओं को थोड़ी मानसिक राहत जरूर देता है। खाली वक्त में ये माताएं ढोलक और मंजीरे की थाप पर भजन-कीर्तन गाकर अपने दुखों को भुलाने का जतन करती हैं, ताकि जीवन के इस कठिन दौर में कुछ पल सुकून से बीत सकें।

कलाबाई और कौशल्या बाई की आपबीती

लिधोरा गांव की रहने वाली 68 वर्षीय कलाबाई अहिरवार पिछले पांच साल से इसी वृद्धाश्रम में जीवन गुजार रही हैं। उनके दो बेटे और तीन बेटियां हैं तथा उनके नाम दो बीघा जमीन थी, जिस पर अब बेटों ने कब्जा जमा लिया है और वे ही उसे जोतते हैं। अपनी पीड़ा बयां करते हुए उन्होंने बताया कि उन्होंने जिन बहुओं की खुशियों के लिए दुआएं मांगी, उन्हीं ने उन्हें घर से निकाल दिया। यहां तक कि नातिन की शादी में भी उन्हें नहीं बुलाया गया। वहीं मुंगावली की रहने वाली 60 वर्षीय कौशल्या बाई यादव के पति का निधन आठ साल पहले हो चुका है। उनके नाम पांच बीघा जमीन थी जिसे यह कहकर बिकवा दिया गया कि उनकी पेंशन शुरू कराई जा रही है, और धोखे से अंगूठा लगवाकर उन्हें धक्के मारकर घर से निकाल दिया गया। उन्होंने तीन महीने बीना स्टेशन और तीन महीने भोपाल के रैन बसेरे में गुजारे। जब वे दोबारा घर गईं तो बहू ने चप्पल दिखाकर उन्हें भगा दिया और धमकी दी कि यदि वे घर आईं तो वह ट्रेन के आगे कूद जाएगी।

पुनिया बाई कोली का दर्द

पिपरई की रहने वाली 65 वर्षीय पुनिया बाई कोली पिछले छह वर्षों से वृद्धाश्रम में रह रही हैं। उनके तीन बेटियां और दो बेटे हैं। उनके एक बेटे ने उन्हें अपने पास रखने का झांसा देकर उनकी पांच बीघा जमीन बिकवा दी। जमीन के बदले मिले दस लाख रुपए में से पांच लाख रुपए एक बेटे ने अपने पास रख लिए और बाकी रकम की एफडी करवा दी, जिसे बाद में बेटे ने तुड़वा लिया। लेकिन महज छह महीने तक साथ रखने के बाद ही उन्हें भी घर से बेदखल कर दिया गया।