अव्यवस्था का केंद्र बने चंदेरी के वित्तीय संस्थान

चंदेरी शहर में संचालित कुल आठ बैंकों और मुख्य डाकघर में प्रतिदिन करोड़ों रुपये का वित्तीय लेन-देन होता है और सैकड़ों नागरिकों का आना-जाना रहता है। इसके बावजूद इन संस्थानों ने अपने परिसर में ग्राहकों तथा कर्मचारियों के वाहनों को खड़ा करने के लिए किसी भी तरह की पार्किंग व्यवस्था नहीं की है।

सड़कों पर वाहन खड़े होने से लग रहा जाम

पार्किंग न होने के कारण बैंक आने वाले लोग अपने दोपहिया और चारपहिया वाहन मजबूरी में मुख्य मार्गों पर ही पार्क कर देते हैं। इस वजह से चौड़ी सड़कें भी संकरी पगडंडियों जैसी लगने लगती हैं और दिनभर में कई बार आवागमन पूरी तरह बाधित हो जाता है।

बैंकों के आसपास जगह न मिलने पर चालक अपने वाहन स्थानीय दुकानों और रिहायशी मकानों के आगे खड़े कर देते हैं। इससे दुकानों तक पहुंचने वाले आम ग्राहकों का रास्ता रुक जाता है और इस बात को लेकर दुकानदारों व वाहन चालकों के बीच अक्सर कहासुनी व तनातनी होती रहती है।

जनरेटरों ने घेरा पैदल चलने का रास्ता

स्थानीय व्यापारियों का यह भी कहना है कि सड़क पर बेतरतीब खड़े इन वाहनों की वजह से उनके कारोबार पर विपरीत असर पड़ रहा है। हालात यह हैं कि बैंकों की लापरवाही सिर्फ वाहन पार्किंग तक सीमित नहीं है, बल्कि कई वित्तीय संस्थानों ने बिजली के लिए बड़े डीजल जनरेटर भी सीधे सड़क किनारे या फुटपाथ पर रख दिए हैं।

सड़क पर रखे गए ये भारी-भरकम जनरेटर काफी जगह घेर लेते हैं, जिसके चलते तीखे मोड़ों और मुख्य रास्तों से गुजरने वाले पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित जगह बहुत कम बची है और दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है।