डिजिटल व्यवस्था के दावों के विपरीत हाल
देशभर में बैंकिंग सेवाओं को हाईटेक और डिजिटल बनाने के तमाम दावे किए जा रहे हैं, लेकिन अशोकनगर जिले के बहादुरपुर क्षेत्र से सामने आई हकीकत इन दावों की पोल खोलती नजर आ रही है। यहां स्थित डाकघर में आधुनिक तकनीक का अभाव है और दर्जनों गांवों के लोगों के वित्तीय लेन-देन का रिकॉर्ड आज भी रजिस्टरों और कागजों तक ही सीमित है।
12 से ज्यादा गांवों के लोग हैं इस पर निर्भर
बहादुरपुर का यह डाकघर आसपास के 12 से अधिक गांवों के निवासियों के लिए मुख्य वित्तीय केंद्र है। ग्रामीण इलाकों के हजारों लोगों के बचत खाते, सुकन्या समृद्धि योजना, आरडी, किसान सम्मान निधि और बुजुर्गों की पेंशन से जुड़े सभी कार्य इसी डाक ऑफिस के माध्यम से संचालित होते हैं।
हाथ से पेन से हो रहा हिसाब-किताब
ग्रामीणों और खाताधारकों का कहना है कि जब वे अपनी मेहनत की कमाई जमा कराने या निकालने आते हैं, तो उनकी पासबुक पर कंप्यूटर प्रिंटेड एंट्री के बजाय कर्मचारियों द्वारा पेन से लिखकर हिसाब दर्ज किया जाता है। लाल और नीले पेन से किए जाने वाले इन लेन-देन के कारण पासबुक पर कोई पुख्ता डिजिटल प्रमाण नहीं बचता है।
इस प्रकार की कार्यप्रणाली से उपभोक्ताओं में भारी रोष व्याप्त है। खाताधारकों का तर्क है कि वर्तमान समय में जब धोखाधड़ी और वित्तीय गड़बड़ियों के मामले सामने आ रहे हैं, तब पेन से की जाने वाली प्रविष्टियों पर आंख मूंदकर भरोसा करना मुश्किल हो गया है। लोगों को डर सता रहा है कि यदि कोई गड़बड़ी हुई तो उनके पास कोई ठोस डिजिटल सुबूत नहीं होगा।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!