सुभाषगंज मंदिर में गूंज रहे प्रवचन

अशोकनगर शहर में इस समय चातुर्मास चल रहा है। सुभाषगंज स्थित जैन मंदिर में मुनिश्री निरंजन सागर जी महाराज के पावन सानिध्य में प्रतिदिन विभिन्न धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। जैन समाज द्वारा यहाँ पर्युषण पर्व भी पूरी श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों और आयोजनों की धूम

पर्व के दौरान मंदिर परिसर में सुबह से लेकर देर शाम तक विविध धार्मिक अनुष्ठान संपन्न हो रहे हैं। वहीं, शाम के समय सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन भी किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं। मुनिश्री के सानिध्य में इन दिनों 'साइंस ऑफ लिविंग' विषय पर विशेष प्रवचन श्रृंखला चल रही है।

विद्या वही जो बंधनों से मुक्त करे

रविवार को आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनिश्री निरंजन सागर जी महाराज ने कहा कि ज्ञान के व्यावहारिक प्रयोग का नाम ही चरित्र है। उन्होंने भारतीय संस्कृति और प्राचीन ग्रंथों का हवाला देते हुए समझाया कि 'सा विद्या या विमुक्तये' यानी विद्या और ज्ञान वही है, जो मनुष्य को अज्ञानता और मोह-माया के बंधनों से पूरी तरह मुक्त कर सके।

आज समाज बच्चों को विदेशों तक केवल दो रोटी कमाने और भौतिक सुख-सुविधाएं जुटाने के लिए भेज रहा है, लेकिन सत्य और ज्ञान को पाकर लौटने की सीख कोई नहीं दे रहा।

मुनिश्री ने चिंता जताते हुए कहा कि आज की शिक्षा प्रणाली केवल आजीविका कमाने तक सीमित रह गई है। अभिभावक अपने बच्चों को केवल भौतिक सुख और धनार्जन के लिए दूर-दूर भेज रहे हैं, जबकि जीवन को सार्थक बनाने के लिए संस्कारों और नैतिक ज्ञान की सबसे अधिक आवश्यकता होती है।

अपने संदेश के अंत में मुनिश्री ने फरमाया कि ज्ञान का सच्चा और वास्तविक परिणाम यही है कि प्राणी मात्र के प्रति मन में मैत्री भाव जागृत हो। मैत्री का सीधा अर्थ सभी जीवों का भला चाहना और उनके प्रति करुणा का भाव रखना है।