अशोकनगर जिले में जमीन के नामांतरण, बंटवारे और सीमांकन जैसे जरूरी कार्यों के लिए तहसील कार्यालयों के चक्कर काट रहे आम नागरिकों के लिए अब राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित राजस्व अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान लंबित मामलों के तेज गति से निराकरण को लेकर सख्त निर्देश जारी किए गए हैं।

कलेक्टर ने की आरसीएमएस पोर्टल के प्रकरणों की समीक्षा

कलेक्टर साकेत मालवीय ने शनिवार को कलेक्ट्रेट में राजस्व अधिकारियों की बैठक बुलाई, जिसमें आरसीएमएस पोर्टल पर दर्ज मामलों की गहन समीक्षा की गई। उन्होंने सभी अधिकारियों को चेतावनी भरे लहजे में स्पष्ट किया कि कोई भी राजस्व प्रकरण बेवजह लंबित नहीं रहना चाहिए। हर मामले का निस्तारण तय समय-सीमा के भीतर किया जाना अनिवार्य है।

बैठक के दौरान कलेक्टर ने जिले के सभी एसडीएम और तहसीलदारों से राजस्व मामलों की वर्तमान स्थिति का ब्योरा लिया। उन्होंने इस बात पर विशेष जोर दिया कि आम जनता को उनके मालिकाना हक से जुड़े दस्तावेज और सेवाएं समय पर मिलनी चाहिए, ताकि उन्हें परेशानियों का सामना न करना पड़े।

ग्रामीण क्षेत्रों में लगेंगे ई-केवाईसी शिविर

चूंकि नामांतरण, बंटवारा और सीमांकन सीधे तौर पर नागरिकों की संपत्ति और भूमि रिकॉर्ड से जुड़े होते हैं, इसलिए इनमें होने वाली देरी आमजन को भारी पड़ती है। इसी समस्या को दूर करने के लिए स्वामित्व अधिकार अभिलेख निष्पादन एवं पंजीयन 2026 योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में विशेष शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों के माध्यम से हितग्राहियों और उनकी भूमि की ई-केवाईसी प्रक्रिया को पूरा कराया जाएगा। इसके अलावा बैठक में फॉर्मर रजिस्ट्री और खरीफ गिरदावरी के कार्यों की भी प्रगति जांची गई।

सीएम हेल्पलाइन और जननी सुरक्षा योजनाओं की भी हुई मॉनिटरिंग

राजस्व विभाग की लंबित सीएम हेल्पलाइन शिकायतों का गुणवत्तापूर्ण समाधान कर विभाग को 'ए' ग्रेड में लाने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही जनसुनवाई, जनप्रतिनिधियों से प्राप्त पत्रों, केंद्रीय मंत्री के पत्रों और अर्द्धशासकीय पत्रों पर भी समयबद्ध कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए।

बैठक के अंतिम चरण में प्रशासनिक अधिकारियों ने राजस्व वसूली, अवैध शराब के विरुद्ध चल रही कार्रवाई, संबल योजना, प्रसूति सहायता और जननी सुरक्षा योजना के पात्र लाभार्थियों को समय पर भुगतान मिलने की स्थिति की भी समीक्षा की। सिविल सूट और उच्च न्यायालय में लंबित मामलों में जवाब समय पर दाखिल करने की हिदायत भी दी गई।