अशोकनगर जिले की स्कूली शिक्षा व्यवस्था के प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए शिक्षा विभाग ने अब सख्त कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। इसके तहत स्कूलों द्वारा यू-डाइज प्लस पोर्टल पर भरी जाने वाली जानकारियों की नियमित जांच और गहन निगरानी की जाएगी, ताकि भविष्य में ग्रेडिंग स्कोर सुधर सके।

आकांक्षी-1 ग्रेड में है जिला, सुधार की है व्यापक गुंजाइश

केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी किए जाने वाले PGI-D 2.0 के तहत जिलों की शैक्षणिक व्यवस्था का मूल्यांकन विभिन्न संकेतकों के आधार पर किया जाता है। वर्ष 2025-26 के दौरान अशोकनगर जिले का कुल PGI स्कोर 280.2 दर्ज किया गया था, जो कि आकांक्षी-1 ग्रेड के अंतर्गत आता है। इस ग्रेड का स्कोर बैंड कुल 600 अंकों में से 21 प्रतिशत से 30 प्रतिशत के बीच होता है।

विभाग के अनुसार, इस ग्रेडिंग का मतलब यह है कि सुधार की आवश्यकता केवल विद्यार्थियों के परीक्षा परिणामों तक सीमित नहीं है। बल्कि स्कूलों में उपलब्ध बुनियादी ढांचे, शिक्षकों की स्थिति, छात्रों का विवरण और अन्य सभी प्रमुख संकेतकों से जुड़े आंकड़ों की सटीकता भी इसमें उतनी ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

अधिकारियों ने दिए पोर्टल पर सही डेटा दर्ज करने के निर्देश

हाल ही में आयोजित हुई कार्यशाला के दौरान जिला शिक्षा अधिकारी मधु शर्मा ने सभी संस्था प्रभारियों को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि वे यू-डाइज पोर्टल पर स्कूल से संबंधित सभी जानकारियां समय पर और पूरी तरह सही अपलोड करें। डेटा में किसी भी प्रकार की लापरवाही अब बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

जिला परियोजना समन्वयक (डीपीसी) राहुल शर्मा ने भी दोहराया कि संस्था प्रभारियों को पोर्टल पर फीड किए गए डेटा की खुद पुष्टि करनी होगी। इसके साथ ही जनशिक्षकों को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे अपने क्षेत्र के अधीन आने वाले सभी स्कूलों के डेटा का अनिवार्य रूप से सत्यापन करें।

कार्यशाला में जिला प्रोग्रामर जीएस नरवरिया ने उपस्थित अमले को यू-डाइज प्लस और PGI से जुड़े तमाम संकेतकों की विस्तार से जानकारी दी। शिक्षा विभाग का मानना है कि अब डेटा एंट्री को महज एक कागजी औपचारिकता न मानकर इसे जिले की समग्र शैक्षणिक ग्रेडिंग सुधारने का मुख्य जरिया बनाया जाना चाहिए।