धार्मिक स्थलों को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग उपेक्षा का शिकार
अशोकनगर जिले के सेहराई इलाके में चंदेरी-मुंगावली मुख्य मार्ग से प्रसिद्ध धार्मिक स्थल रणछोड़ धाम और बेतवा नदी के पुल तक जाने वाला सड़क मार्ग पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। खिरिया ढाबा से रणछोड़ धाम की कुल दूरी करीब 25 किलोमीटर है, जिसमें आमनचार तक का चार किलोमीटर का हिस्सा डामरीकृत है, लेकिन इसके आगे बेतवा नदी के पुल तक का लगभग 20 किलोमीटर का लंबा रास्ता पूरी तरह कच्चा और गड्ढों में तब्दील हो चुका है।
देवगढ़ और रणछोड़ धाम जाने वाले यात्रियों को होती है परेशानी
यह सड़क सिर्फ रणछोड़ धाम का रास्ता ही नहीं है, बल्कि यह क्षेत्र उत्तर प्रदेश की सीमा से भी सटा हुआ है। मध्य प्रदेश और अन्य जिलों से जैन तीर्थ क्षेत्र अतिशय क्षेत्र देवगढ़ जाने वाले श्रद्धालु भी इसी रास्ते को शॉर्टकट के तौर पर चुनते हैं। इस मार्ग पर कई ग्रामीण बस्तियां बसी हुई हैं, और रास्ता सिंगल लेन होने के कारण विपरीत दिशा से आने वाले वाहनों को साइड देना भी जोखिम भरा साबित होता है।
सड़क पर बने गहरे गड्ढों के कारण आए दिन दोपहिया वाहन चालक संतुलन बिगड़ने से हादसों का शिकार हो रहे हैं। हल्की बारिश या धूल उड़ने के समय स्थिति और अधिक भयावह हो जाती है, जिससे स्थानीय नागरिकों का आवागमन दूभर हो गया है।
ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने दी आंदोलन की चेतावनी
सड़क की इस दयनीय स्थिति से परेशान होकर क्षेत्र के आधा दर्जन से अधिक गांवों के जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने अब इसके खिलाफ आवाज बुलंद कर दी है। सड़क के पुनर्निर्माण की मांग उठाने वालों में जिला पंचायत सदस्य कन्हैया राम लोधी, सरपंच प्रतिनिधि भरत सिंह लोधी, चाली राजा यादव, पंडा लोधी, रामविलास तिवारी और पहलवान सिंह सहित कई प्रमुख ग्रामीण शामिल हैं।
यदि शासन-प्रशासन ने जल्द ही इस मार्ग का डामरीकरण करवाकर निर्माण कार्य शुरू नहीं किया, तो स्थानीय ग्रामीण मजबूरन बड़ा आंदोलन करेंगे।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!