अशोकनगर के यादव कॉलोनी स्थित श्री पंचमुखी हनुमान मंदिर में शनिवार को श्रद्धालुओं ने विशेष धार्मिक अनुष्ठान किया। पुजारी पंडित किशन लाल मिश्रा के सानिध्य में महालय श्राद्ध पूर्णिमा महाव्रत का आयोजन विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ।

सोलह दिवसीय पितृपक्ष का हुआ आरंभ

इस अनुष्ठान के साथ ही क्षेत्र में 16 दिवसीय पितृपक्ष की शुरुआत हो चुकी है, जो आगामी 10 अक्टूबर तक चलेगा। इस दौरान श्रद्धालु अपने पितरों की शांति और मोक्ष के लिए तर्पण व पिंडदान करेंगे।

धार्मिक ग्रंथों का हवाला देते हुए पंडित किशन लाल मिश्रा ने जानकारी दी कि आश्विन मास के कृष्ण पक्ष को पितृपक्ष कहा जाता है। ज्योतिषीय गणना के मुताबिक भाद्रपद पूर्णिमा को सूर्य के कन्या राशि में प्रवेश करने के कारण इसे कनागत भी कहा जाता है।

वृद्धि योग में तर्पण का विशेष महत्व

आयोजन के दिन दोपहर तक गंड योग रहा, जिसके बाद वृद्धि योग का निर्माण हुआ। जानकारों के अनुसार इस योग में किए गए पितृ तर्पण का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होता है।

पंडित मिश्रा ने जोर देकर कहा कि केवल कर्मकांड ही काफी नहीं है। भूखे को भोजन कराना, जरूरतमंद को वस्त्र देना, गौ-सेवा करना तथा पृथ्वी, जल व आकाश के सभी जीवों के प्रति दया भाव रखना ही सच्चा श्राद्ध है। इससे पितर तृप्त होकर घर-परिवार को सुख-समृद्धि और शांति का आशीर्वाद देते हैं।

शास्त्र सम्मत दान और तर्पण की विधि

वायु पुराण के हवाले से उन्होंने बताया कि पितृपक्ष के दौरान तिल, कुशा, अन्न और वस्त्र का दान अमृत के समान फलदायी होता है और वह सीधे पितरों तक पहुंचता है।

तर्पण की सही प्रक्रिया समझाते हुए उन्होंने बताया कि मध्याह्न काल में दक्षिण दिशा की ओर मुख करके तिल, जौ, चावल, दूध और पुष्प के साथ पितरों का तर्पण किया जाता है। इससे पहले पूर्व दिशा की ओर मुख करके देवताओं का और उत्तर दिशा की ओर मुख करके ऋषियों का तर्पण करने का शास्त्र सम्मत विधान है।