जीवाजी विश्वविद्यालय के दल ने किया अशोकनगर का शैक्षणिक भ्रमण
ग्वालियर स्थित जीवाजी विश्वविद्यालय की प्राचीन भारतीय इतिहास, संस्कृति एवं पुरातत्व अध्ययनशाला के विद्यार्थियों और शोधार्थियों ने हाल ही में अशोकनगर जिले की प्राचीन धरोहरों का प्रत्यक्ष अध्ययन किया। विभागाध्यक्ष डॉ. शांतिदेव सिसोदिया के निर्देशन में संपन्न हुए इस शैक्षणिक दौरे में एमए तृतीय सेमेस्टर के लगभग 35 छात्र-छात्राओं के अलावा कई पीएचडी शोधार्थियों ने भी शिरकत की।
गुप्तकालीन और मध्यकालीन स्थापत्य कला का बारीकी से किया गया अध्ययन
इस शैक्षणिक दल ने जिले के कदवाया, रन्नोद, महुआ और तेरही क्षेत्रों में पहुंचकर वहां मौजूद प्राचीन मंदिर समूहों, ऐतिहासिक शैव मठों और अन्य पुरातात्विक अवशेषों का गहराई से मुआयना किया। विद्यार्थियों ने गुप्त काल और मध्यकाल के दौरान निर्मित इन मंदिरों की अनूठी स्थापत्य शैली के साथ-साथ पत्थरों पर उकेरी गई प्राचीन मूर्तिकला के ऐतिहासिक पक्षों को समझा।
विशेषज्ञों से जाने क्षेत्र के अनछुए ऐतिहासिक और पुरातात्विक रहस्य
भ्रमण के दौरान जब यह दल कदवाया पहुंचा, तो स्थानीय पुरातत्वविद् हेमंत दुबे ने विद्यार्थियों को इस क्षेत्र के गौरवशाली इतिहास और प्राचीन शैव परंपरा के विकास के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस दौरान छात्रों ने पत्थरों पर बनी विभिन्न आकृतियों और प्राचीन लिपि से जुड़े कई सवाल भी पूछे, जिनका मौके पर मौजूद विशेषज्ञों ने संतोषजनक जवाब दिया।
इस अध्ययन यात्रा में शामिल पीएचडी शोधार्थी वैभव शर्मा और वैशाली गुर्जर ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि कदवाया को पहले ही पर्यटन ग्राम घोषित किया जा चुका है। हालांकि, यदि रन्नोद, महुआ और तेरही जैसे अन्य पुरातात्विक स्थलों को भी इसके साथ जोड़ दिया जाए।
शोधार्थियों का मानना है कि इन सभी ऐतिहासिक स्थलों को मिलाकर यदि एक एकीकृत हेरिटेज टूरिज्म सर्किट तैयार किया जाए, तो यह पूरा अंचल मध्य प्रदेश के पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख और आकर्षक केंद्र के रूप में अपनी नई पहचान बना सकता है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!