अशोकनगर जिले के चंदेरी कस्बे में स्वच्छता व्यवस्था को लेकर एक बार फिर गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। यहां शहरभर का कचरा उठाने वाले वाहन नियमों को ताक पर रखकर खुले में संचालित किए जा रहे हैं।

मार्गों पर बिखर रहा कचरा

क्षमता से अधिक कचरे से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली जब डंपिंग ग्राउंड की तरफ जाते हैं, तो रास्ते में ही कचरा नीचे गिरने लगता है। थोड़ी सी भी हवा चलने पर वाहनों में लदे कागज, प्लास्टिक की पन्नियां और अन्य हल्का कचरा उड़कर सीधे सड़कों पर फैल जाता है।

एनजीटी के नियमों की हो रही अनदेखी

राष्ट्रीय हरित अधिकरण यानी एनजीटी और स्वच्छता सर्वेक्षण के स्पष्ट दिशा-निर्देश हैं कि कचरे का परिवहन हमेशा ढंके हुए या पूरी तरह बंद वाहनों के माध्यम से ही किया जाना चाहिए। इसके बावजूद स्थानीय स्तर पर इन नियमों की अनदेखी धड़ल्ले से जारी है।

इस स्थिति से परेशान होकर स्थानीय रहवासी अंजुल रैकवार, रवि सोनी, प्रदीप कुमार, राजेश कुमार और बिट्‌टू रैकवार सहित कई नागरिकों ने नगर पालिका प्रशासन के समक्ष कड़ी आपत्ति जताई है। उन्होंने मांग की है कि खुले वाहनों से कचरा ढोने के काम पर तुरंत रोक लगाई जाए।

राहगीरों और चालकों के लिए बढ़ा खतरा

बाशिंदों का कहना है कि कचरा गाड़ी के पास से गुजरते ही तेज बदबू के साथ प्लास्टिक और धूल के कण लोगों के ऊपर आकर गिरते हैं। विशेषकर दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह स्थिति खतरनाक साबित हो रही है, क्योंकि उड़ता हुआ कचरा सीधे चेहरे और आंखों में पड़ने से कई बार दुर्घटना होने का अंदेशा बना रहता है।