जनसुनवाई में पहुंचा ग्रामीणों का दल

अशोकनगर जिले के मढ़खेड़ा गांव के रहवासी मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई में पहुंचे और पंचायत के सरपंच मुस्लिम खां के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। ग्रामीणों ने सरपंच पर प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग, भ्रष्टाचार और जातिगत भेदभाव बरतने के गंभीर आरोप लगाए हैं। इस संबंध में कलेक्टर के नाम एक ज्ञापन सौंपकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई है।

गृहग्राम में विकास कार्यों को प्राथमिकता देने का आरोप

ग्रामीणों का मुख्य आरोप है कि सरपंच ने अपने मूल गांव मढ़खेड़ा की अनदेखी करते हुए अपने गृहग्राम बरखेड़ा हेमराज में विकास कार्यों को प्राथमिकता दी है। उनका कहना है कि सरकारी योजनाओं का लाभ विशेष रूप से अपने रिश्तेदारों और चुनिंदा लोगों तक ही सीमित रखा गया है। इसके अलावा, पुराने स्टॉप डैम को नया बताकर उसका भुगतान प्राप्त करने और खेत तालाबों के निर्माण में व्यापक स्तर पर गड़बड़ी किए जाने की आशंका भी जताई गई है।

बुनियादी सुविधाओं का अभाव और मनरेगा में धांधली

ग्रामीणों द्वारा प्रस्तुत विवरण के अनुसार, बरखेड़ा हेमराज में कई सार्वजनिक और हितग्राही मूलक कुएं बनवाए गए, जबकि मढ़खेड़ा इन सुविधाओं से वंचित रहा। स्थानीय आदिवासी बस्ती में मुक्तिधाम न होने के कारण बारिश के मौसम में अंतिम संस्कार करने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। मनरेगा योजना के तहत स्थानीय मजदूरों को काम न देकर अन्य स्थान के लोगों को काम पर रखने के आरोप भी लगाए गए हैं।

शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि नाली निर्माण के मद से राशि आहरित कर ली गई, लेकिन धरातल पर कार्य अधूरा छोड़ दिया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना के आवंटन में भी चहेतों को लाभ पहुंचाने की बात कही गई है। ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि पिछले लगभग चार वर्षों से पंचायत में किसी प्रकार की ग्रामसभा का आयोजन नहीं किया गया है।

ज्ञापन के माध्यम से ग्रामीणों ने पंचायत क्षेत्र में स्वीकृत समस्त निर्माण कार्यों की लागत, व्यय और गुणवत्ता की स्वतंत्र जांच कराए जाने की मांग की है। उन्होंने बताया कि इससे पूर्व भी स्थानीय स्तर पर शिकायतें की जा चुकी हैं, परंतु अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों ने प्रशासन से चेतावनी भरे लहजे में कहा कि यदि शीघ्र ही जांच कर दोषियों के विरुद्ध कार्रवाई नहीं की गई, तो वे आंदोलन तेज करने के लिए बाध्य होंगे।