अशोकनगर में निकला भव्य और अनुशासित पथ संचलन
विजयादशमी पर्व और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शताब्दी वर्ष के समापन के अवसर पर अशोकनगर शहर में एक विशाल पथ संचलन का आयोजन किया गया। इस आयोजन में नगर की कुल 10 बस्तियों से आए स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में बेहद अनुशासन के साथ बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
शहर के मुख्य मार्गों से गुजरने के बाद यह संचलन गांधी पार्क से होते हुए मानस भवन तक पहुंचा, जहां इसका औपचारिक समापन किया गया। इस पूरे कार्यक्रम के दौरान स्थानीय नागरिकों में राष्ट्रभक्ति और विशेष उत्साह का माहौल देखने को मिला।
संतों और पदाधिकारियों की रही गरिमामयी उपस्थिति
इस कार्यक्रम में मध्य भारत प्रांत के प्रांत कार्यवाह हेमंत जी सेठिया मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित रहे। इसके अलावा मंच पर नगर संघचालक ऋषभ जैन और मुख्य अतिथि के रूप में मुनिश्री निरंजन सागर जी महाराज भी मौजूद रहे, जिनकी उपस्थिति ने कार्यक्रम की गरिमा को और बढ़ाया।
शताब्दी वर्ष राष्ट्र निर्माण के संकल्प का अवसर: हेमंत सेठिया
मुख्य वक्ता हेमंत सेठिया ने अपने संबोधन में संघ की सौ वर्षों की लंबी सेवा और समर्पण यात्रा पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि देश के सर्वांगीण विकास के लिए ज्ञान, शील और संगठन की शक्ति का होना बेहद जरूरी है।
उन्होंने आगे स्पष्ट किया कि ज्ञान मनुष्य को विवेक प्रदान करता है, शील से उत्तम चरित्र का निर्माण होता है और संगठन समाज को एक सूत्र में पिरोकर रखता है। उनके अनुसार, यह शताब्दी वर्ष केवल एक उत्सव तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश के निर्माण के लिए नए संकल्प लेने का समय है।
संघ के पांच प्रमुख आयामों पर दिया गया जोर
कार्यक्रम के दौरान संघ के पांच प्रमुख आयामों को रेखांकित किया गया। इनमें स्व का बोध यानी अपनी संस्कृति और राष्ट्रभाषा के प्रति सजगता, तथा सामाजिक समरसता के जरिए भेदभाव मिटाकर वसुधैव कुटुंबकम की भावना को मजबूत करने की बात कही गई।
इसके अतिरिक्त कुटुंब प्रबोधन के माध्यम से परिवारों में संस्कार बढ़ाने, पर्यावरण संरक्षण के तहत जल और जंगलों की रक्षा करने, तथा नागरिक कर्तव्यों का पूरी ईमानदारी और अनुशासन के साथ पालन करने का संदेश स्वयंसेवकों और आम जनमानस को दिया गया।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!