अशोकनगर जिले में स्थानीय किसानों ने अपनी विभिन्न कृषि और राजस्व संबंधी समस्याओं को लेकर मुखर रुख अपनाया है। भारतीय किसान संघ के बैनर तले मंगलवार को स्थानीय कृषि उपज मंडी परिसर में भगवान बलराम जयंती का आयोजन किया गया। इस धार्मिक और सांस्कृतिक अवसर के बाद किसानों ने एकजुट होकर एक आक्रोशित बाइक रैली निकाली, जो शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए कलेक्ट्रेट कार्यालय तक पहुंची।

तहसीलदार को सौंपे गए प्रधानमंत्री और कलेक्टर के नाम ज्ञापन

कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद किसानों ने अपनी मांगों से जुड़ा ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारियों तक पहुंचाया। संघ की ओर से तहसीलदार आलोक श्रीवास्तव को देश के प्रधानमंत्री और स्थानीय कलेक्टर के नाम दो अलग-अलग ज्ञापन सौंपे गए। इस दौरान किसानों ने स्पष्ट किया कि खेती-किसानी से जुड़ी उनकी दिक्कतें लगातार बढ़ रही हैं, जिनका समय पर निराकरण होना आवश्यक है।

राजस्व, सिंचाई और पोर्टल पर उत्पादन क्षमता बढ़ाने की मांग

प्रदर्शन के दौरान किसानों ने राजस्व और कृषि विभाग से जुड़ी कई विसंगतियों को उठाया। उन्होंने पोर्टल पर गेहूं, चना, मसूर और सरसों जैसी प्रमुख फसलों की उत्पादन क्षमता में वृद्धि करने की मांग रखी। साथ ही, कंप्यूटर रिकॉर्ड से गायब हुई भूमि को केवल एक आवेदन के आधार पर दुरुस्त करने और लंबित नामांतरण मामलों का त्वरित निपटारा करने को कहा गया। किसानों ने मांग की कि खेतों के रास्तों को नक्शे में दर्ज किया जाए और खेत सड़क योजना को अमलीजामा पहनाया जाए, इसके साथ ही बटांकन और सीमांकन का कार्य 10 दिन के भीतर पूरी तरह निशुल्क किया जाए।

फसल बीमा, खाद और राजघाट नहर परियोजना का मुद्दा

ज्ञापन के माध्यम से किसानों ने वर्ष 2025 के बकाया फसल बीमा का भुगतान शीघ्र कराए जाने की मांग की। खाद वितरण को लेकर कहा गया कि सभी सोसायटियों से खाद का वितरण हो तथा जो किसान ऑनलाइन टोकन बुक नहीं कर पा रहे हैं, उनके लिए वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जाए। सिंचाई के मोर्चे पर राजघाट परियोजना से जिले की सभी तहसीलों तक नहरों का पानी पहुंचाने की पुरजोर मांग की गई। इसके अतिरिक्त, मंडी परिसरों के बाहर तुलाई पर रोक लगाने और किसानों से तुलाई के एवज में दोहरी वसूली न किए जाने की बात भी उठाई गई।

निर्बाध बिजली और ट्रांसफार्मर क्षमता बढ़ाने पर जोर

बिजली आपूर्ति को लेकर किसानों ने ग्रामीण क्षेत्रों में 10 घंटे बिना किसी बाधा के बिजली देने की मांग रखी। बिजली नेटवर्क को सुधारने के लिए खराब और तिरछे हो चुके पोलों को बदलने, ढीले तारों को कसने और ओवरलोडेड ट्रांसफार्मरों की क्षमता में वृद्धि करने की बात कही गई। किसानों ने आपातकालीन व्यवस्था के तहत जिले में ट्रांसफार्मर बैंक स्थापित करने की भी मांग की।

प्रधानमंत्री के नाम दिए ज्ञापन में जीएसटी हटाने और सम्मान निधि बढ़ाने की मांग

प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन में कृषि उपकरणों और खेती से जुड़े अन्य सामानों पर से जीएसटी पूरी तरह समाप्त करने की मांग की गई। किसानों ने मांग रखी कि उनकी सभी फसलों का समर्थन मूल्य लागत आधारित होना चाहिए। इसके अलावा, किसान सम्मान निधि की राशि बढ़ाकर 10 हजार रुपए प्रति हेक्टेयर करने और किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) की ऋण सीमा को बढ़ाकर 5 लाख रुपए किए जाने की वकालत की गई। जीएम फसलों के व्यवसायिक उपयोग पर रोक जारी रखने की मांग करते हुए संघ के पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी इन मांगों पर शीघ्र सकारात्मक कार्रवाई नहीं हुई, तो वे उग्र आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।