अशोकनगर जिले में इन दिनों सवारी ऑटो रिक्शा का उपयोग यात्रियों के बजाय व्यावसायिक सामान ढोने के लिए धड़ल्ले से किया जा रहा है। स्थिति यह है कि जो काम लोडिंग वाहनों का होना चाहिए, उसे सवारी ऑटो चालक कर रहे हैं।

सामान ढुलाई से लोडिंग चालकों के सामने आई रोजी-रोटी की संकट

सवारी ऑटो में खाद की बोरियां, सीमेंट, सरिया, बल्लियां और पाइप जैसे भारी निर्माण सामग्री की ढुलाई की जा रही है। इस अवैध परिवहन के कारण शहर के लोडिंग वाहन चालकों को पर्याप्त काम नहीं मिल पा रहा है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती जा रही है।

तहसीलदार को सौंपा गया ज्ञापन

इस समस्या से परेशान होकर एकता लोडिंग यूनियन से जुड़े चालकों ने मंगलवार को कलेक्ट्रेट का रुख किया। चालकों ने प्रशासनिक अधिकारियों से मुलाकात कर अपनी पीड़ा रखी और तहसीलदार आलोक श्रीवास्तव को एक ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन के माध्यम से चालकों ने बताया कि शहर में अधिकांश ऑटो चालक यात्रियों को बैठाने के बजाय सामान की ढुलाई में लगे हुए हैं। इससे लोडिंग गाड़ियां खाली खड़ी रहती हैं और वाहन चालकों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है।

किस्त भरना और परिवार चलाना हुआ मुश्किल

वाहन चालकों का कहना है कि लगातार काम न मिलने के कारण वे अपने लोडिंग वाहनों की बैंक किस्तें समय पर जमा नहीं कर पा रहे हैं। हालात इतने खराब हो गए हैं कि उनके लिए अपने परिवारों का भरण-पोषण करना भी दूभर हो गया है।

चालकों ने यह भी आरोप लगाया कि सवारी ऑटो में क्षमता से अधिक सामान भरकर ले जाने के कारण आए दिन रास्ते में विवाद की स्थिति बनती है। उन्होंने पहले इस मामले की शिकायत ऑटो यूनियन के पदाधिकारियों से भी की थी, लेकिन वहां से कोई संतोषजनक समाधान नहीं निकला।

अंततः परेशान चालकों ने जिला प्रशासन से हस्तक्षेप करने की गुहार लगाई है। उन्होंने मांग की है कि सवारी ऑटो में सामान की अवैध ढुलाई और ओवरलोडिंग पर तत्काल रोक लगाई जाए, ताकि लोडिंग वाहन चालकों को भी काम मिल सके।