अशोकनगर जिले के शाढ़ौरा नगर परिषद के सफाई कर्मचारियों का गुस्सा प्रशासनिक उपेक्षा के चलते फूट पड़ा है। विभिन्न मांगों को लेकर कर्मचारियों ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का रास्ता चुना है, जिसका शुक्रवार को लगातार दूसरा दिन रहा। इस आंदोलन के कारण स्थानीय स्तर पर साफ-सफाई व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित हो गई है।
ट्रेड यूनियन की चेतावनी के बाद शुरू हुआ आंदोलन
अखिल भारतीय सफाई मजदूर ट्रेड यूनियन की ओर से नगर परिषद को पहले ही स्पष्ट चेतावनी दी गई थी। यूनियन ने ज्ञापन सौंपकर कहा था कि यदि तय समय सीमा में मांगें नहीं मानी गईं तो काम बंद कर दिया जाएगा। इसी चेतावनी के तहत 24 सितंबर से कर्मचारियों ने कार्य बहिष्कार करते हुए आंदोलन का बिगुल बजा दिया।
प्रमुख मांगें: ईपीएफ और नियमितीकरण का मुद्दा
हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों ने अपनी चार सूत्रीय मांगें प्रशासन के सामने रखी हैं। इनमें मुख्य रूप से सभी कर्मचारियों के खातों में ईपीएफ की राशि जमा कराने और उसका ब्योरा देने की मांग शामिल है। इसके साथ ही, संविदा व अन्य सफाई कर्मियों को नियमित करने की आवाज भी प्रमुखता से उठाई जा रही है।
कर्मचारियों की आर्थिक समस्याओं को देखते हुए पिछले एक महीने का रुका हुआ वेतन तत्काल जारी करने की मांग की गई है। साथ ही यह भी मांग रखी गई है कि भविष्य में हर महीने की 1 से 5 तारीख के बीच नियमित रूप से वेतन का भुगतान किया जाए।
कोरे आश्वासनों से तंग आकर उठाया कदम
यूनियन पदाधिकारियों का कहना है कि पूर्व में अधिकारियों द्वारा उनकी मांगें एक साल के भीतर पूरी किए जाने का आश्वासन दिया गया था। परंतु लंबा समय बीत जाने के बाद भी धरातल पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
प्रशासन को पांच दिन का समय देने के बावजूद जब कोई संतोषजनक मौखिक या लिखित जवाब नहीं मिला, तब जाकर कर्मचारियों ने सड़कों पर उतरकर हड़ताल शुरू करने का कड़ा निर्णय लिया।
मांगें पूरी होने तक डटे रहेंगे कर्मी
शुक्रवार को आंदोलन के दूसरे दिन भी सफाई कर्मियों का प्रदर्शन जारी रहा। कर्मचारियों ने दो टूक शब्दों में कह दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित और व्यावहारिक कार्रवाई नहीं होती, तब तक उनका यह अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन और कार्य बहिष्कार यूं ही जारी रहेगा।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!