अशोकनगर के श्री वासुपूज्य श्वेतांबर जैन मंदिर में पर्युषण महापर्व का उल्लास इन दिनों चरम पर है। पर्व के छठे दिन आयोजित धार्मिक कार्यक्रमों में जैन समाज के लोगों ने पूरी श्रद्धा और भक्ति के साथ हिस्सा लिया, जिससे पूरा मंदिर परिसर आध्यात्मिक रंग में रंगा नजर आया।
कल्पसूत्र वाचन और जन्मोत्सव के प्रसंग
धार्मिक अनुष्ठानों के दौरान श्रावक जी के सानिध्य में कल्पसूत्र का वाचन किया गया। इस दौरान भगवान महावीर स्वामी के जन्म से लेकर उनकी दीक्षा तक के प्रेरणादायी प्रसंगों का विस्तार से वर्णन हुआ, जिसे सुनकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए और मंदिर परिसर प्रभु के जयकारों से गूंज उठा।
प्रभु महावीर के त्याग और उपदेशों पर प्रकाश
प्रवचन के दौरान बताया गया कि कल्पसूत्र हमें भगवान महावीर के त्याग और तपस्या के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है। प्रभु के जन्म के बाद 63 दिक्कुमारियों और 64 इंद्रों ने मेरु पर्वत पर दिव्य जन्मोत्सव मनाया था, जिससे पूरे लोक में मंगलमय माहौल बन गया था।
दीक्षा प्राप्ति के बाद भगवान महावीर को कई उपसर्गों का सामना करना पड़ा। चंड कौशिक सर्प के उद्धार का प्रसंग सुनाते हुए यह संदेश दिया गया कि क्रोध और अहंकार इंसान के पतन की वजह बनते हैं, जबकि क्षमा और समभाव ही मनुष्य की असली ताकत हैं।
पालना और स्वप्न यात्रा के साथ महापूजन
दोपहर से पहले भगवान महावीर स्वामी के पालने और स्वप्न जी को गाजे-बाजे और ढोल-नगाड़ों के साथ लाभार्थी कोचर परिवार के निवास से मंदिर परिसर तक लाया गया। इस दौरान पंचकल्याणक महापूजन और श्री शांतिस्नात्र पूजन का आयोजन हुआ, जिसमें बच्चों और युवाओं ने भारी संख्या में शिरकत की।
इस धार्मिक आयोजन के दौरान भगवान को पालना व स्वप्न अर्पित करने का सौभाग्य कोचर परिवार को मिला। वहीं पंचकल्याणक महापूजन दीपेश कुमार आदिश अवॉड परिवार द्वारा संपन्न कराया गया और प्रभावना वितरण राजमल, नितिन कुमार एवं धीर कोठारी परिवार की तरफ से किया गया।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!