असली नंबर से आया फोन, अंग्रेजी में की बात

अशोकनगर क्षेत्र में साइबर ठगों ने ठगी का नया और शातिर तरीका अपनाया है। अब ठग हिंदी के बजाय फर्राटेदार अंग्रेजी बोलकर लोगों को बैंक अधिकारी होने का विश्वास दिला रहे हैं। ऐसा ही एक ताजा मामला सामने आया है जिसमें शातिर बदमाशों ने फाइनेंस बैंक के एक ग्राहक को अपना शिकार बनाते हुए उसके बैंक खाते से डेढ़ लाख रुपए पार कर दिए।

खास बात यह रही कि ठगों ने कॉल करने के लिए बैंक के असली टोल-फ्री नंबर का इस्तेमाल किया था। नंबर असली दिखने के कारण पीड़ित व्यापारी को शुरुआत में किसी प्रकार का संदेह नहीं हुआ और वह आसानी से उनके झांसे में फंसता चला गया।

शॉपिंग वाउचर एक्टिवेट करने का दिया झांसा

पीड़ित व्यापारी शिवम छाबड़ा ने बताया कि उन्होंने कुछ समय पहले ही एक फाइनेंस बैंक से नया क्रेडिट कार्ड बनवाया था। बीते 7 अक्टूबर को उनके पास एक कॉल आई थी। फोन करने वाले व्यक्ति ने अंग्रेजी में बातचीत शुरू की और खुद को पढ़ा-लिखा बैंककर्मी बताया।

वेरी गुड आफ्टरनून सर, आपको कार्ड डिलीवर हो गया है, यू आर नॉट फेसिंग एनी प्रॉब्लम?

कॉल करने वाले ने क्रेडिट कार्ड का वेलकम वाउचर शॉपिंग वाउचर के रूप में एक्टिवेट करने का लालच दिया। जब पीड़ित के मोबाइल ऐप पर एक्टिवेशन का विकल्प नहीं दिखा, तो ठग ने चालाकी से कॉल पहले अपने कथित सीनियर और बाद में एक महिला को ट्रांसफर कर दी।

स्क्रीन शेयर कराकर खुद ही दर्ज किया ओटीपी

इसके बाद आरोपियों ने व्हाट्सएप पर एक लिंक भेजकर उस पर क्लिक करवाया और कार्ड नंबर दर्ज कराया। वीडियो कॉल के जरिए पीड़ित के फोन की स्क्रीन शेयर करवा ली गई। मोबाइल की स्क्रीन साझा होने के कारण ठगों को ओटीपी दिख गया और उन्होंने खुद ही ओटीपी दर्ज कर तीन अलग-अलग चरणों में पचास-पचास हजार रुपए यानी कुल डेढ़ लाख रुपए निकाल लिए।

घटना का पता चलते ही पीड़ित ने तुरंत अपना क्रेडिट कार्ड ब्लॉक करवाया और मामले की शिकायत साइबर सेल में दर्ज कराई। विशेषज्ञों के अनुसार ठग इंटरनेट आधारित वीओआईपी और स्पूफिंग सॉफ्टवेयर का उपयोग करते हैं, जिससे कॉलर आईडी पर असली नंबर दिखाई देता है। स्क्रीन शेयरिंग का उद्देश्य एसएमएस ट्रे में आने वाले ओटीपी को देखना होता है।