अशोकनगर जिले के शासकीय विधि महाविद्यालय में गुरुवार को राष्ट्रीय छात्र संगठन (एनएसयूआई) ने प्राचार्य गरिमा राठौर के विरुद्ध अपना विरोध दर्ज कराया। छात्रों के इस संगठन ने प्राचार्य पर गंभीर आरोप लगाए हैं कि उन्होंने विद्यार्थियों को एक विशेष राजनीतिक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए बाध्य किया।

क्या है पूरा मामला?

एनएसयूआई के पदाधिकारियों के अनुसार, महाविद्यालय के एक आधिकारिक सोशल मीडिया समूह में प्राचार्य की ओर से एक संदेश प्रसारित किया गया था। इस संदेश में स्पष्ट रूप से कहा गया था कि 8 जुलाई को आयोजित होने वाली एक 'संगोष्ठी' में अनुपस्थित रहने वाले छात्रों को आगामी प्रायोगिक परीक्षाओं में बैठने नहीं दिया जाएगा, और उनके अंकों पर भी इसका नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

संगठन का दावा है कि छात्रों को यह कहकर बुलाया गया था कि यह एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक संगोष्ठी है। हालांकि, जब विद्यार्थी कार्यक्रम स्थल पर पहुंचे, तो उन्हें पता चला कि यह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और भारतीय जनता पार्टी से संबंधित एक आयोजन था। एनएसयूआई ने इस कृत्य को छात्रों को गुमराह करने और एक शासकीय पद पर बैठे व्यक्ति द्वारा पद की गरिमा का उल्लंघन बताया है।

एनएसयूआई की मांग और आगे की रणनीति

विरोध प्रदर्शन के दौरान, एनएसयूआई के कार्यकर्ताओं ने महाविद्यालय परिसर में 'सद्बुद्धि यज्ञ' का आयोजन किया। इस यज्ञ के माध्यम से उन्होंने प्राचार्य गरिमा राठौर को तत्काल प्रभाव से निलंबित करने की मांग की। संगठन के नेताओं ने यह भी उल्लेख किया कि प्राचार्य से जुड़े कई विवादित मामले पहले भी सामने आ चुके हैं।

एनएसयूआई ने स्पष्ट किया कि सद्बुद्धि यज्ञ का मुख्य उद्देश्य प्राचार्य को यह संदेश देना है कि वे राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहकर शिक्षा व्यवस्था को अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता दें। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि प्राचार्य के खिलाफ उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे जिला कांग्रेस कमेटी के साथ मिलकर इस आंदोलन को और अधिक व्यापक और तीव्र बनाएंगे।