अशोकनगर शहर के मुख्य केंद्र और ऐतिहासिक पहचान से जुड़े गांधी पार्क का कायाकल्प अब तेजी से आकार ले रहा है। इस प्रमुख स्थल के सौंदर्यीकरण और पुनर्निर्माण का लगभग सत्तर प्रतिशत काम पूरा किया जा चुका है, जिसके चलते इस चौराहे का रूप अब पहले से काफी बदला हुआ नजर आने लगा है।

आधुनिक सुविधाओं के साथ संवर रहा 78 साल पुराना स्मारक

यह ऐतिहासिक गांधी स्मारक करीब 78 साल पुराना है। इसे आधुनिक सुविधाओं और पारंपरिक वास्तुकला के मेल से संवारा जा रहा है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा एक नए और भव्य चबूतरे पर स्थापित की जाएगी, जिसके ऊपर लाल बलुआ पत्थर की सुंदर छतरी बनकर तैयार हो चुकी है।

इतनी लागत से हो रहा है निर्माण कार्य

नगर पालिका द्वारा इस विकास कार्य के लिए लगभग 47.50 लाख रुपए का टेंडर जारी किया गया था, जो निविदा प्रक्रिया के बाद 44.40 लाख रुपए की स्वीकृत राशि में तय हुआ। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए ठेकेदार को 180 दिन का समय दिया गया था, जिसके तहत पार्क के फर्श पर प्राकृतिक पत्थरों का उपयोग किया गया है।

सुंदरीकरण के इस दौर में पार्क के चारों ओर सैंडस्टोन की जालियां लगाई जा रही हैं और एक नया स्टेनलेस स्टील का प्रवेश द्वार भी बनाया गया है। इसके साथ ही पार्क की सुरक्षा के लिए करीब चार फीट ऊंची चारदीवारी का निर्माण किया गया है और परिसर में फव्वारे व जलधाराएं भी स्थापित की जानी हैं।

पार्क का है एक ऐतिहासिक महत्व

गौरतलब है कि यह स्थान केवल एक साधारण चौराहा नहीं है, बल्कि इसका गहरा ऐतिहासिक संदर्भ है। इतिहास के अनुसार, 30 जनवरी 1948 को महात्मा गांधी के निधन के पश्चात यहां संगमरमर की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने का निर्णय लिया गया था, जो करीब साढ़े सात से आठ फीट ऊंची है।

पिछले 78 वर्षों में इस पार्क के स्वरूप में समयानुसार कई बार फेरबदल किए गए हैं। वर्तमान में चल रहा यह विकास कार्य इस ऐतिहासिक स्थल का चौथा बड़ा कायाकल्प माना जा रहा है। निर्माण कार्य के दौरान गांधीजी की प्रतिमा की पूरी सुरक्षा का ध्यान रखते हुए उसे सुरक्षित तरीके से ढंककर रखा गया है।