ग्वालियर-चंबल अंचल के अशोकनगर जिले के मुंगावली इलाके में प्रशासन ने उर्वरक कालाबाजारी और संदिग्ध सामग्री के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। क्षेत्र के बरवाह गांव में एक निर्माणाधीन मकान के भीतर से भारी मात्रा में डीएपी खाद की बोरियां बरामद की गईं, जिन्हें प्रशासनिक अमले ने मौके पर ही जब्त कर लिया।
तहसीलदार के नेतृत्व में की गई औचक कार्रवाई
स्थानीय ग्रामीणों और कोटवार से मिली सूचना के आधार पर तहसीलदार कैलाशचंद्र मालवीय के निर्देशन में प्रशासनिक दल ने देर शाम बरवाह गांव का रुख किया। जांच के दौरान बस्ती के समीप स्थित एक निर्माणाधीन मकान को चिन्हित किया गया, जो राजोबाई पत्नी फूल सिंह का बताया गया है। अधिकारियों ने भीतर प्रवेश कर जब मुआयना किया, तो वहां डीएपी खाद की बोरियों का स्टॉक छिपाकर रखा गया था।
बोरियों पर नहीं था लॉट नंबर, 2025 की छपी थी पैकिंग
कृषि विभाग की वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी (एसएडीओ) ने मौके पर पहुंचकर जब बोरियों की बारीकी से जांच की, तो कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। इन बोरियों पर कोई लॉट नंबर अंकित नहीं किया गया था, जबकि उन पर पैकिंग का वर्ष 2025 मुद्रित पाया गया। प्रथम दृष्टя खाद पूरी तरह संदिग्ध प्रतीत होने के बाद प्रशासन ने सभी 52 बोरियों को अपने कब्जे में ले लिया। इन बोरियों को ट्रैक्टर-ट्रॉली के माध्यम से सुरक्षित मुंगावली तहसील कार्यालय पहुंचाया गया है।
महिला ने दूसरे गांव के व्यक्ति पर फोड़ा ठीकरा
मकान मालिक महिला से जब खाद के इस जखीरे के संबंध में पूछताछ की गई, तो उसने शुरुआती दौर में कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया। हालांकि, बाद में उसने खुलासा किया कि रतभानपुर गांव के एक व्यक्ति ने उसके मकान में यह खाद रखवाई थी। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि महिला के पास अपनी कोई कृषि भूमि नहीं है, जिससे इस बात की आशंका और बढ़ गई है कि इस अवैध भंडारण के पीछे किसी अन्य रैकेट का हाथ है।
तहदार कैलाशचंद्र मालवीय ने स्पष्ट किया है कि महिला द्वारा बताए गए संदिग्धों के नामों को आधार बनाकर गहराई से छानबीन की जा रही है। जांच प्रक्रिया पूरी होने के बाद दोषियों के विरुद्ध थाने में एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। फिलहाल प्रशासन ने जब्त खाद के नमूने प्रयोगशाला में परीक्षण के लिए भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी है, ताकि लैब रिपोर्ट के आधार पर खाद की असलियत का खुलासा हो सके।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!