अशोकनगर जिले के जोलन गांव का एक मामला सामने आया है, जहां मक्का के भुट्टे तोड़ने के कार्य में लगे 33 मजदूरों ने पारिश्रमिक नहीं मिलने पर नाराजगी जताई है। मजदूरों का कहना है कि उन्होंने करीब पंद्रह दिन तक खेतों में मेहनत की, लेकिन उन्हें तयशुदा भुगतान नहीं दिया गया।
450 रुपए प्रतिदिन की तय हुई थी मजदूरी
यह सभी मजदूर रीवा, सीधी, शहडोल और मैहर जिले के अमरपाटन क्षेत्र के रहने वाले हैं। रोजगार की तलाश में ये लोग ट्रेन के जरिए पिपरई रेलवे स्टेशन पहुंचे थे। स्टेशन से जोलन गांव के रहने वाले भोलू जाट इन्हें अपने साथ खेत ले गए थे। तय समझौते के अनुसार इन मजदूरों को प्रतिदिन 450 रुपए मजदूरी दी जानी थी।
रुपये मांगने पर दी गई धमकी और गांव छोड़ने का दबाव
मजदूरों ने आरोप लगाया कि पंद्रह दिन तक लगातार काम करने के बावजूद उन्हें मेहनताने के नाम पर केवल दो हजार रुपये ही शुरुआती दौर में दिए गए थे। इसके बाद उनके पास खाने-पीने का भी संकट खड़ा हो गया। जब उन्होंने अपनी पूरी मजदूरी मांगी, तो उन्हें पहले काम चालू रखने को कहा गया और भुगतान की जिद करने पर उन्हें धमकाते हुए गांव से जाने का दबाव बनाया गया।
भुगतान न मिलने पर शुक्रवार की सुबह सभी मजदूर अपने बच्चों और सामान के साथ पैदल ही गांव से बाहर निकल पड़े। रास्ते में एक ऑटो चालक ने उनकी स्थिति को देखते हुए उनकी मदद की और उन्हें अशोकनगर तक पहुंचाया। शाम के वक्त ये सभी पीड़ित मजदूर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे और प्रशासनिक अधिकारियों को अपनी दास्तां सुनाई।
श्रम विभाग ने फोन पर की चर्चा
कलेक्ट्रेट में शिकायत मिलने के बाद श्रम विभाग के अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया। अधिकारियों ने संबंधित व्यक्ति से फोन के माध्यम से संपर्क किया। विभाग के मुताबिक उस व्यक्ति ने बकाया राशि चुकाने की बात तो कही है, लेकिन भुगतान की निश्चित तिथि स्पष्ट नहीं की है। इस पूरे प्रकरण की सूचना संबंधित थाने को भी दे दी गई है।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!