अशोकनगर जिले के विल्हेरु सब स्टेशन के अंतर्गत आने वाले लगभग एक दर्जन से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों में इन दिनों बिजली संकट गहराया हुआ है। भीषण गर्मी के बीच हो रही अंधाधुंध बिजली कटौती से आम जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है और रात के समय गांवों में ब्लैक आउट जैसे हालात बन जाते हैं।
त्योहार और गर्मी के बीच अघोषित कटौती से आक्रोश
एक तरफ क्षेत्र में नवरात्रि का धार्मिक पर्व शुरू हो चुका है, वहीं दूसरी तरफ लगातार गुल रहने वाली बिजली ने लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। इस अघोषित लोड शेडिंग का बुरा असर स्कूली बच्चों की पढ़ाई, रोजमर्रा के घरेलू कामकाज और छोटे कारोबारियों के व्यापार पर पड़ रहा है। मल्हारगढ़ के स्थानीय निवासी अजय कुमार, महेंद्र सिंह और राम कुमार ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि शनिवार को सुबह 9 बजे कटी बिजली शाम 4 बजे आई, लेकिन वह भी महज आधे घंटे के भीतर दोबारा गुल हो गई।
पेयजल संकट और प्रभावित गांव
यह क्षेत्र पथरीला होने के कारण बिजली न मिलने पर नल-जल योजनाएं भी पूरी तरह ठप पड़ जाती हैं, जिससे भीषण गर्मी में पीने के पानी का गंभीर संकट भी खड़ा हो गया है। बिजली विभाग की इस लचर व्यवस्था से बिल्हेरू, मल्हारगढ़, खुटिया, बमौरी, पिपरिया, मडावन टांडा, सावलहेड़ा, भेडका, किरमिचखेडी और भेसोन कला सहित कई गांवों के लोग गुस्से में हैं। ग्रामीणों का मुख्य सवाल यह है कि यदि लोड शेडिंग जरूरी है, तो इसकी पूर्व सूचना उपभोक्ताओं को क्यों नहीं दी जाती।
विभाग का पक्ष और तकनीकी कारण
मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी मुंगावली के एई अनुरुद्ध सिंह यादव ने स्थिति पर प्रतिक्रिया देते हुए बताया कि वह हाल ही में छुट्टी पर आए हैं और पिछले एक सप्ताह से रात्रि के समय बिजली आपूर्ति में विशेष दिक्कतें आ रही हैं। उन्होंने बताया कि प्रदेश स्तर पर मांग के मुकाबले बहुत कम बिजली मिल रही है, जहां 4094 मेगावाट की आवश्यकता के विरुद्ध मात्र 171 मेगावाट ही उपलब्ध हो पा रही है। इसके अलावा पवन ऊर्जा (विंड टरबाइन) से मिलने वाली सप्लाई भी घटकर केवल 330 मेगावाट रह गई है, जिसके कारण यह समस्या उत्पन्न हुई है। उन्होंने कहा कि वे लौटकर इस मामले में उच्च अधिकारियों से चर्चा करेंगे।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!