अशोकनगर जिले में अन्य पिछड़ा वर्ग के अधिकारों और उनकी सही गिनती को लेकर आवाज उठनी शुरू हो गई है। इसी क्रम में गुरुवार को स्थानीय कलेक्ट्रेट परिसर में ओबीसी महासभा के बैनर तले बड़ी संख्या में कार्यकर्ता एकत्रित हुए और जिला प्रशासन को अपनी मांगों का ज्ञापन सौंपा।

रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे कार्यकर्ता

ओबीसी महासभा से जुड़े पदाधिकारी और तमाम सदस्य हाथों में मांग तख्तियां लेकर रैली के रूप में कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे। वहां उन्होंने देश के राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त के नाम संबोधित ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा, जिसमें आगामी जनगणना के दौरान ओबीसी वर्ग की गिनती को लेकर स्पष्ट प्रावधान करने की बात कही गई है।

जातिवार आंकड़ों के संकलन पर जोर

महासभा कातर्क है कि देश में सामाजिक न्याय सुनिश्चित करने, समान अवसर प्रदान करने और पिछड़े वर्गों के उत्थान के लिए जनगणना में उनकी सटीक और विश्वसनीय जानकारी होना अनिवार्य है। संगठन ने मांग की है कि ओबीसी वर्ग की कुल जनसंख्या के साथ-साथ उनकी जातिवार सामाजिक, आर्थिक और शैक्षणिक स्थिति के प्रमाणिक आंकड़े भी जुटाए जाएं, ताकि सरकारी योजनाओं का लाभ सही तरीके से मिल सके।

संगठन के प्रतिनिधियों का कहना है कि इन आंकड़ों के स्पष्ट होने से शिक्षा, रोजगार, आरक्षण और अन्य कल्याणकारी नीतियों के निर्माण में काफी मदद मिलेगी, जिससे समाज के इस बड़े वर्ग को सीधा फायदा पहुंचेगा।

प्रश्नावली में श्रेणी स्पष्ट न होने पर जताई चिंता

ज्ञापन में इस बात पर विशेष चिंता व्यक्त की गई कि केंद्र सरकार द्वारा पूर्व में जातियों की गणना शामिल करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन हाल ही में अधिसूचित प्रश्नावली में अनुसूचित जाति और जनजाति का तो उल्लेख है परंतु अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए कोई अलग स्पष्ट श्रेणी नहीं बनाई गई है। महासभा का मानना है कि इससे पूरी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर असर पड़ सकता है।

अंत में संगठन ने मांग की है कि जनगणना प्रपत्र में तुरंत संशोधन कर ओबीसी का पृथक कॉलम जोड़ा जाए, जातियों की प्रमाणित सूची व विशिष्ट कोड तय किए जाएं, तथा आंकड़े सार्वजनिक करने की समयसीमा भी तय हो।