अशोकनगर जिले में हाल ही में आयोजित एक युवा संवाद कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अपने जीवन के कई अनछुए पहलुओं पर चर्चा की। इस दौरान उन्होंने युवाओं के सवालों के जवाब देते हुए अपने राजनीतिक जीवन की सबसे बड़ी चुनौती यानी साल 2019 की हार का भी विशेष रूप से जिक्र किया।

गलती दूसरों पर थोपने के बजाय खुद में झांका

कार्यक्रम में एक युवा द्वारा पूछे गए सवाल का जवाब देते हुए सिंधिया ने बताया कि जब इंसान असफल होता है, तो आम तौर पर वह अपनी नाकामी का ठीकरा दूसरों पर फोड़ने लगता है। उन्होंने समझाया कि जब हम किसी और पर एक उंगली उठाते हैं, तो बाकी तीन उंगलियां हमारी खुद की तरफ इशारा करती हैं। वर्ष 2019 में चुनाव हारने के बाद उनके मन में भी यही विचार आया कि खामी कहीं न कहीं उनके अंदर ही रही होगी। उन्होंने खुद को बदलने और जनता के साथ अपने पुराने रिश्तों को नए सिरे से जोड़ने पर ध्यान केंद्रित किया।

उन्होंने युवाओं को प्रेरित करते हुए कहा कि दुख होना स्वाभाविक है, लेकिन उस दुख के साथ ही भीतर इतनी शक्ति भी होनी चाहिए कि इंसान दोबारा उठकर कड़ी मेहनत कर सके। जब आत्मविश्वास और मेहनत का यह संगम बनता है, तो सफलता का मार्ग प्रशस्त होता है। उन्होंने सलाह दी कि जीवन में जब भी ऐसे चौराहे आएं जहां दिशा चुननी पड़े, तो फैसले दिमाग के साथ-साथ दिल की आवाज सुनकर लें।

पिता के निधन के समय का कठिन दौर किया साझा

अपने जीवन के सबसे बड़े और शुरुआती संकट को याद करते हुए केंद्रीय मंत्री ने वर्ष 2001 का वह दिन याद किया जब वह बेंगलुरु जा रहे थे और उन्हें उनके पिता के निधन की सूचना मिली थी। उन्होंने बताया कि उस दुखद घड़ी में भी ईश्वर व्यक्ति को भीतर से लड़ने की शक्ति प्रदान करता है। उस समय उनके सामने अपनी मां और बहन की देखभाल करने के साथ-साथ अपने पिता से जुड़े लाखों लोगों के परिवार को संभालने की बड़ी जिम्मेदारी थी।

सिंधिया ने कहा कि वक्त बहुत तेजी से बीतता है और 2001 से लेकर आज तक 25 साल का सफर पूरा हो चुका है। यदि जीवन में कभी कोई बड़ी विपत्ति या गहरी खाई जैसी स्थिति आए, तो व्यक्ति को कभी हिम्मत नहीं हारनी चाहिए और पूरे आत्मविश्वास के साथ दोबारा खड़े होना चाहिए।

नौकरी के दिनों को किया याद और डांडिया में लिया हिस्सा

अपने शुरुआती पेशेवर जीवन के अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने बताया कि राजनीति में आने से पहले उन्होंने करीब छह साल तक न्यूयॉर्क, हॉन्गकॉन्ग और मुंबई जैसे शहरों में नौकरी की थी। मुंबई में संघर्ष के दिनों को याद करते हुए उन्होंने बताया कि कैसे वे बारिश के दौरान भागकर टैक्सी में बैठते थे और इन तमाम अनुभवों ने उन्हें जीवन के बहुमूल्य पाठ पढ़ाए।

युवाओं को संदेश देते हुए उन्होंने कहा कि वही काम चुनें जिसमें उनकी सच्ची रुचि हो और जो उनका दिल कहे। इस अशोकनगर प्रवास के दौरान युवा संवाद के बाद सिंधिया एक स्थानीय डांडिया कार्यक्रम में भी पहुंचे, जहां उन्होंने पूरे उत्साह के साथ डांडिया खेला और क्षेत्रवासियों को नवरात्रि पर्व की शुभकामनाएं दीं।