अशोकनगर के ईसागढ़ में सज गया श्री आनंदपुर धाम

अशोकनगर जिले की ईसागढ़ तहसील क्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध श्री आनंदपुर धाम में 100वें अवतरण दिवस और जन्म शताब्दी महोत्सव को लेकर उत्साह चरम पर है। यहां चल रही तैयारियों को अंतिम रूप दिया जा चुका है और 20 सितंबर को होने वाले इस मुख्य आयोजन में शामिल होने के लिए देश भर से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के आने का सिलसिला शुरू हो गया है।

श्रद्धालुओं के ठहरने और सुविधाओं के व्यापक इंतजाम

आने वाले श्रद्धालुओं की भारी संख्या को ध्यान में रखते हुए धाम परिसर के भीतर और आसपास विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। मंदिर परिसर और अन्य प्रमुख स्थलों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। इसके अलावा यात्रियों के ठहरने के लिए आवास, परिसर में अस्थाई वॉशरूम और अन्य बुनियादी सुविधाओं को दुरुस्त कर लिया गया है ताकि किसी को असुविधा न हो।

19 और 20 सितंबर को होने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा

यह दो दिवसीय धार्मिक अनुष्ठान 19 सितंबर से प्रारंभ होगा। इस दिन सुबह 6 बजे श्री आनंद सरोवर में स्नान के पश्चात श्री परमहंस अद्वैत मंदिर में विशेष आरती और पूजा-अर्चना संपन्न होगी। इसके बाद सुबह 11:30 बजे विशाल सत्संग भवन में श्रद्धालुओं को परम पावन श्री दर्शन लाभ प्राप्त होंगे। शाम को 7 बजे श्री आनंद शांति भवन में आरती होगी और रात 8:30 बजे शताब्दी अवतरण दिवस के उपलक्ष्य में विशेष सांस्कृतिक व आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।

समारोह के मुख्य दिन यानी 20 सितंबर को सुबह 7:30 बजे श्री आनंद शांति कुंज में आरती के साथ शताब्दी समारोह का मुख्य चरण शुरू होगा। दोपहर बाद शाम 4:45 बजे विशाल सत्संग भवन में पुनः परम पावन श्री दर्शन होंगे। तत्पश्चात शाम करीब 7 बजे श्री आनंद शांति भवन में संध्या आरती और पूजा-अर्चना का कार्यक्रम रखा गया है।

प्रबंधन ने की पारंपरिक वेशभूषा और गरिमा बनाए रखने की अपील

उत्सव की पवित्रता को बनाए रखने के लिए धाम प्रबंधन ने सभी आगंतुक श्रद्धालुओं से विशेष अनुरोध किया है। महिलाओं से अपील की गई है कि वे सलवार-सूट, लंबी कुर्ती-पायजामी जैसी सरल और पारंपरिक पोशाक पहनकर आएं। वहीं पुरुषों के लिए शर्ट-पैंट या कुर्ता-पायजामा जैसे शालीन वस्त्र पहनने का आग्रह किया गया है।

प्रबंधन ने यह भी निर्देश दिए हैं कि मंदिर तथा सभी उपासना स्थलों के भीतर प्रवेश करते समय श्रद्धालु अपने सिर को ढककर रखें। आयोजकों ने सभी से अपेक्षा की है कि वे अपने संयमित आचरण और शालीन पहनावे से श्री आनंदपुर धाम की आध्यात्मिक गरिमा और पवित्रता को बनाए रखने में सहयोग करें।