शिवपुरी जिले के चर्चित चकरामपुर हत्याकांड के पीड़ित भदौरिया परिवार ने अपनी सुरक्षा हटाए जाने पर चिंता जताते हुए इसे तत्काल बहाल करने की मांग की है। परिवार के सदस्य सोमवार को करणी सेना के पदाधिकारियों के साथ पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचे और अपनी सुरक्षा बहाल करने की गुहार लगाई।

पीड़ित भोला उर्फ योगेंद्र भदौरिया ने बताया कि 17 नवंबर 2023 को नरवर थाना क्षेत्र के चकरामपुर गांव में पुरानी रंजिश के चलते उनके परिवार पर जानलेवा हमला हुआ था। इस जघन्य वारदात में उनके पिता मुन्ना भदौरिया, मां आशा भदौरिया, चाचा लक्ष्मण भदौरिया और ममेरे भाई अमर सिंह सेगर की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस हमले में भोला और उनके भाई गंभीर रूप से घायल हो गए थे। इस मामले में नरवर थाना पुलिस ने 33 आरोपियों के खिलाफ हत्या सहित विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया था।

30 हजार का इनामी आरोपी अब भी फरार

भोला ने बताया कि इस मामले के 31 आरोपी वर्तमान में जेल में हैं। एक आरोपी को जमानत मिल चुकी है, जबकि 30 हजार रुपये का इनामी आरोपी अजीत अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। उन्होंने पुलिस पर आरोपी को गिरफ्तार करने में लापरवाही बरतने का आरोप लगाया।

पीड़ित परिवार ने चिंता व्यक्त की कि न्यायालय में गवाही का दौर चल रहा है। ऐसे में सुरक्षा हटाए जाने से पूरे परिवार और गवाहों की जान को खतरा बढ़ गया है। परिवार को आशंका है कि आरोपी पक्ष किसी भी समय अप्रिय घटना को अंजाम दे सकता है।

करणी सेना ने पुलिस पर उठाए सवाल

करणी सेना के राष्ट्रीय महासचिव अतुल प्रताप सिंह ने पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि तीन साल बाद भी इनामी आरोपी की गिरफ्तारी न होना पुलिस की विफलता को दर्शाता है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पीड़ित परिवार की सुरक्षा हटाने के लिए फर्जी पंचनामा तैयार किया गया। उन्होंने इस संबंध में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक संजीव मुले को शपथ पत्र की एक प्रति भी सौंपी।

संगठन ने नरवर थाना प्रभारी विनय यादव पर भी पीड़ित परिवार के प्रति द्वेषपूर्ण रवैया अपनाने का आरोप लगाया। करणी सेना ने चेतावनी दी है कि यदि सात दिनों के भीतर पीड़ित परिवार की सुरक्षा बहाल नहीं की गई और फरार आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया गया, तो नरवर थाने का घेराव कर उग्र आंदोलन किया जाएगा।

पुलिस ने दी यह सफाई

इस मामले में नरवर थाना प्रभारी विनय यादव ने बताया कि सुरक्षा हटाने की कार्रवाई वरिष्ठ अधिकारियों के निर्देश पर की गई थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान अतिरिक्त पुलिस बल की आवश्यकता होने के कारण, वहां तैनात सुरक्षा गार्डों को जिला मुख्यालय बुलाया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि पीड़ित परिवार दोबारा आवेदन देकर सुरक्षा की मांग कर सकता है, और वरिष्ठ अधिकारियों की स्वीकृति मिलने पर नियमानुसार सुरक्षा उपलब्ध कराई जाएगी।