शिवपुरी जिले के कोलारस में रविवार को एक ऐतिहासिक भूमिपूजन समारोह संपन्न हुआ। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने अदाणी समूह द्वारा स्थापित किए जा रहे दक्षिण एशिया के सबसे बड़े निजी मिसाइल इकोसिस्टम मैन्युफैक्चरिंग प्लांट की आधारशिला रखी।

इस महत्वपूर्ण कार्यक्रम में अदाणी समूह के चेयरमैन गौतम अदाणी के पुत्र जीत और करण अदाणी भी विशेष रूप से उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में कहा कि इस प्लांट में निर्मित मिसाइलें 1000 किलोमीटर तक मार करने में सक्षम होंगी, जिसका अर्थ है कि पाकिस्तान का लगभग हर कोना इसकी जद में आ जाएगा।

रक्षा क्षेत्र में मध्य प्रदेश की बढ़ती ताकत

केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने बताया कि ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट 2025 में अदाणी समूह ने मध्य प्रदेश में 1.10 लाख करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की थी, और शिवपुरी में यह डिफेंस यूनिट उसी घोषणा की पहली बड़ी परियोजना है। अदाणी समूह के निदेशक जीत अदाणी ने जानकारी दी कि इस प्लांट में कंपोजिट प्रोपेलेंट, परीक्षण सुविधाएं और विस्फोटक का निर्माण किया जाएगा। अगले तीन वर्षों में इस परियोजना में 500 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री ने अदाणी समूह द्वारा डिजाइन किए गए क्रॉस-एयर डिफेंस उपकरण का अवलोकन भी किया। यह मल्टी-लॉन्चर प्रणाली छोटी मिसाइलों और अन्य हवाई खतरों को अत्यंत कम समय में निष्क्रिय करने की क्षमता रखती है, जो 'आत्मनिर्भर भारत' की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मध्य प्रदेश की नई रक्षा शक्ति: पांच प्रमुख बिंदु

1. देश में तीसरा सबसे बड़ा रक्षा उत्पादन केंद्र: वर्तमान में मध्य प्रदेश में 6 सरकारी रक्षा उत्पादन इकाइयां हैं, जो महाराष्ट्र (9) और उत्तर प्रदेश (7) के बाद तीसरे स्थान पर है। अब निजी क्षेत्र का सबसे बड़ा मिसाइल कॉम्प्लेक्स जुड़ने से यह स्थिति और मजबूत होगी।

2. रणनीतिक स्थान का लाभ: शिवपुरी का पाली क्षेत्र एनएच-27 (ईस्ट-वेस्ट कॉरिडोर) पर स्थित है। यह गुजरात के बंदरगाहों और उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है, जिससे रक्षा सामग्री की आवाजाही में तेजी आएगी।

3. 'रॉ मैटेरियल से रेडी' तक: इस परिसर में रक्षा उत्पादन के लिए आवश्यक कच्चे माल, प्रोपेलेंट, गन पाउडर से लेकर मिसाइल निर्माण और असेंबली तक की सभी प्रक्रियाएं एक ही स्थान पर संपन्न होंगी।

4. डिफेंस हब के रूप में विकास: भिंड में असॉल्ट राइफलें, स्नाइपर और एमएमजी जैसी बंदूकें ढाली और असेंबल की जाती हैं, जबकि ग्वालियर में वायुसेना का एक प्रमुख बेस है। इस क्षेत्र के विकास से यह एक महत्वपूर्ण डिफेंस हब के रूप में उभरेगा।

5. रोजगार के अवसर: इस परियोजना से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग 4 से 5 हजार लोगों को रोजगार मिलने का अनुमान है।

भोपाल को भी मिलेगी बिजनेस हब की सौगात

इसी क्रम में, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव सोमवार को भोपाल के सतगढ़ी में 173 एकड़ भूमि पर विकसित होने वाले इंडस्ट्रियल पार्क का भूमिपूजन करेंगे। इस पार्क का नामकरण भारतीय जनसंघ के संस्थापक डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नाम पर किया जाएगा।

इस पार्क में दिल्ली के भारत मंडपम की तर्ज पर 10,000 लोगों की क्षमता वाला एक कन्वेंशन सेंटर भी बनाया जाएगा। इसके अतिरिक्त, यहां आईटी और गारमेंट से संबंधित उद्योगों की स्थापना को बढ़ावा दिया जाएगा, जिससे प्रदेश की आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।