शिवपुरी जिले में एक छह साल की बच्ची के साथ हुए दुष्कर्म के मामले में किशोर न्याय बोर्ड ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। बोर्ड ने नाबालिग आरोपी को दोषी ठहराते हुए उसे एक साल के लिए इंदौर के बाल संप्रेषण गृह में भेजने का आदेश दिया है। इसके अतिरिक्त, पीड़िता के पुनर्वास और सहायता के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण से एक लाख रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान करने की सिफारिश भी की गई है।

क्या था पूरा मामला?

यह घटना गोवर्धन थाना क्षेत्र की है। पुलिस द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, आरोपी किशोर ने एक छह वर्षीय बालिका को आइसक्रीम खिलाने का लालच देकर अपने साथ ले गया था और फिर उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना सामने आने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज किया और आरोपी को गिरफ्तार कर किशोर न्याय बोर्ड के समक्ष पेश किया।

किशोर न्याय बोर्ड का फैसला

इस मामले की सुनवाई किशोर न्याय बोर्ड की प्रधान मजिस्ट्रेट प्रिया शर्मा, सदस्य सरला वर्मा और रंजीत गुप्ता की पीठ ने की। बोर्ड ने सभी तथ्यों और साक्ष्यों पर विचार करने के बाद आरोपी को दोषी पाया। अपने आदेश में बोर्ड ने कहा कि चूंकि आरोपी की वर्तमान आयु 18 वर्ष 7 माह है, इसलिए उसे एक वर्ष की अवधि के लिए इंदौर स्थित विशेष गृह में रखा जाएगा।

बोर्ड ने अपने फैसले में पीड़ित बालिका के भविष्य और पुनर्वास को ध्यान में रखते हुए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को एक लाख रुपये की प्रतिकार राशि उपलब्ध कराने की सिफारिश की है। इस पूरे मामले में शासन की ओर से सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी शमीम खान ने प्रभावी पैरवी की।