ग्वालियर-चंबल अंचल के शिवपुरी जिले स्थित विजयाराजे सिंधिया मेडिकल कॉलेज में पदस्थ सामुदायिक औषधि विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. छत्रपाल प्रजापति की नियुक्ति को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने अवैध करार देते हुए निरस्त कर दिया है। अदालत ने अपने फैसले में माना है कि इस पद पर नियुक्ति के समय तय किए गए सेवा नियमों, योग्यताओं और अनुभव संबंधी मानकों की अनदेखी की गई थी।

वर्ष 2023 में दायर की गई थी याचिका

यह पूरा कानूनी विवाद कॉलेज में ही कार्यरत डॉ. मानबहादुर राजपूत की तरफ से साल 2023 में दायर की गई एक रिट याचिका के माध्यम से सामने आया था। याचिका में मुख्य रूप से यह चुनौती दी गई थी कि डॉ. प्रजापति का चयन और नियुक्ति पूरी तरह से निर्धारित प्रावधानों के विरुद्ध हुई है, क्योंकि उनके पास पद के लिए जरूरी अहर्ताएं उस समय नहीं थीं।

याचिकाकर्ता की ओर से नेशनल मेडिकल कमीशन (पूर्ववर्ती एमसीआई) के दिशा-निर्देशों का हवाला दिया गया था। इसके तहत सामुदायिक औषधि विभाग में सहायक प्राध्यापक के लिए एमडी या एमएस की डिग्री के साथ-साथ तीन साल की जूनियर रेजिडेंसी और एक साल की सीनियर रेजिडेंसी का तजुर्बा अनिवार्य होता है।

अनुभव और डिग्री की तिथियों में मिला अंतर

न्यायालय में पेश किए गए दस्तावेजों के अनुसार, डॉ. प्रजापति ने जून 2018 में अपनी एमडी की परीक्षा उत्तीर्ण की थी, जबकि उनकी नियुक्ति का आदेश 20 अगस्त 2017 का दिखाया गया था। याचिकाकर्ता ने दलील दी कि चयन के वक्त उनके पास अपेक्षित तीन वर्ष का अनुभव भी नहीं था और अन्य प्रशासनिक नियमों का भी उल्लंघन किया गया था।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाईकोर्ट की डबल बेंच ने इस नियुक्ति को पूरी तरह खारिज कर दिया। अदालत ने डॉ. छत्रपाल प्रजापति को तत्काल प्रभाव से अपने पद से हटने और कामकाज बंद करने के स्पष्ट निर्देश दिए हैं।

कॉलेज प्रबंधन और याचिकाकर्ता की प्रतिक्रिया

शिवपुरी मेडिकल कॉलेज के अधीक्षक आशुतोष चौऋषी ने इस संबंध में बताया कि मामला उच्च न्यायालय में विचाराधीन था, हालांकि अभी तक कॉलेज प्रबंधन को आदेश की आधिकारिक और वैधानिक प्रति प्राप्त नहीं हुई है। प्रति मिलते ही अदालत के निर्देशों का पूरी तरह से पालन सुनिश्चित किया जाएगा।

वहीं दूसरी ओर, याचिकाकर्ता डॉ. मानबहादुर राजपूत ने फैसले पर संतोष जताते हुए कहा कि यह सांठगांठ और नियमों को ताक पर रखकर की गई नियुक्तियों के खिलाफ एक बड़ा फैसला है। उन्होंने कहा कि लंबी कानूनी लड़ाई के बाद आखिरकार सच्चाई की जीत हुई है और अदालत ने न्याय किया है।