शिवपुरी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज में बरती गई कथित लापरवाही के मामले में गाज गिरनी शुरू हो गई है। मरीज की मौत के बाद गठित की गई तीन सदस्यीय जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर प्रबंधन ने सख्त कदम उठाए हैं।
क्या था पूरा मामला
यह पूरा प्रकरण खनियाधाना तहसील के अंतर्गत आने वाले आहार बानपुर गांव के रहने वाले 50 वर्षीय हरिराम प्रजापति की मौत से जुड़ा हुआ है। स्वास्थ्य बिगड़ने पर परिजनों ने उन्हें पहले खनियाधाना के स्थानीय अस्पताल में दिखाया था, जहां से उन्हें शिवपुरी मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया था।
परिजनों ने लगाए थे गंभीर आरोप
मृतक के बेटे अरुण प्रजापति ने आरोप लगाया था कि मेडिकल कॉलेज पहुंचने पर वहां मौजूद डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने उनके पिता का ठीक से परीक्षण नहीं किया और जल्दबाजी में ग्वालियर रेफर कर दिया। एम्बुलेंस मिलने में भी देरी हुई और अंततः ग्वालियर ले जाते वक्त रास्ते में उनके पिता की जान चली गई।
घटना के बाद बेटे का एक वीडियो भी सामने आया था जिसमें उसने अस्पताल की व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। इस वीडियो के वायरल होने के बाद हरकत में आए कॉलेज प्रशासन ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यों की एक विशेष समिति बनाई थी।
जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर एक्शन
जांच कमेटी ने पाया कि अस्पताल में मरीज का समय पर उचित परीक्षण नहीं किया गया और उसे बिना डॉक्टर के हस्ताक्षर के ही रेफर कर दिया गया था। इसी रिपोर्ट की सिफारिशों के तहत कार्रवाई की गई है।
प्रशासन ने आकस्मिक चिकित्सा विभाग के जूनियर रेजीडेंट डॉ. राज यादव और मेडिसिन विभाग की जूनियर रेजीडेंट डॉ. प्रियंका ठाकुर को आगामी आदेश तक निलंबित कर दिया है। इसके अलावा, मेडिसिन विभाग के सह प्राध्यापक डॉ. रीतेश यादव और कैजुअल्टी मेडिकल ऑफिसर डॉ. निर्मल कदम को भी रेफरल प्रक्रिया एवं परीक्षण में खामियां पाए जाने पर चेतावनी पत्र जारी किए गए हैं।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!