शिवपुरी जिले के अंतर्गत आने वाले डेहरवारा गांव में मूसलाधार बारिश के बाद जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। यहां की करीब ढाई किलोमीटर लंबी कच्ची सड़क पूरी तरह से कीचड़ में तब्दील हो चुकी है, जिसके चलते पिछले दो दिनों से स्कूल वाहनों ने गांव की ओर रुख करना बंद कर दिया है। मार्ग की दुर्दशा के कारण स्थानीय लोगों और स्कूली विद्यार्थियों की मुश्किलें काफी बढ़ गई हैं।

सीमावर्ती मार्ग पर कीचड़ से यातायात ठप

यह खस्ताहाल मार्ग डेहरवारा को कुशयारा से जोड़ता है, जो कोलारस और शिवपुरी विधानसभा क्षेत्रों की सीमा पर स्थित है। ग्रामीणों के मुताबिक यह रास्ता बरसों से कच्चा है और मामूली बारिश में भी इस पर पैदल चलना जोखिम भरा हो जाता है। ताजा मानसूनी बारिश के बाद यहां स्थिति इतनी बिगड़ गई कि वाहन चालकों ने इस रास्ते से गुजरने से साफ इंकार कर दिया है।

सौ बच्चों की पढ़ाई और अभिभावकों की दोहरी दौड़

गांव के लगभग 100 बच्चे शिवपुरी शहर के विभिन्न विद्यालयों में अध्ययन करते हैं। पहले ये सभी बच्चे गांव के भीतर से ही स्कूल बसों के जरिए आते-जाते थे। अब बसें न आने के कारण अभिभावकों को खुद अपने साधनों का उपयोग करना पड़ रहा है। ग्रामीण अपने बच्चों को मोटरसाइकिल पर बैठाकर राजगढ़ तक छोड़ते हैं और फिर वापसी में उन्हें लेकर आते हैं।

बच्चों को स्कूल पहुंचाने की इस लंबी प्रक्रिया में ग्रामीणों का काफी समय बर्बाद हो रहा है, जिसका सीधा असर उनके कृषि कार्यों और दैनिक रोजगार पर पड़ रहा है। खेतों और जरूरी कामों को छोड़कर अभिभावक बच्चों के आवागमन की व्यवस्था में जुटे रहने को विवश हैं।

दो दशक पुरानी मांग पर अब तक नहीं हुआ अमल

क्षेत्रीय निवासियों का दर्द है कि वे पिछले बीस वर्षों से इस मार्ग को डामरीकृत या पक्का बनवाने की गुहार लगा रहे हैं। इस सिलसिले में कई बार प्रशासनिक अमले से लेकर जनप्रतिनिधियों तक लिखित व मौखिक शिकायतें की जा चुकी हैं, परंतु हर बार सिर्फ आश्वासन ही हाथ लगे हैं।

ग्रामीणों का यह भी कहना है कि इस क्षेत्र के दोनों विधायकों द्वारा सड़क निर्माण का भरोसा दिया गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर कार्ययोजना मूर्त रूप नहीं ले पाई है। नतीजतन हर साल बारिश के मौसम में ग्रामीणों को इसी तरह की नारकीय स्थिति से जूझना पड़ता है।

प्रशासन ने दिया जांच और निरीक्षण का भरोसा

इस पूरे मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कोलारस के एसडीएम अनूप श्रीवास्तव ने जानकारी दी है कि स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थल निरीक्षण के लिए एक विशेष टीम भेजी जाएगी। मार्ग की वास्तविक परिस्थिति का आकलन करने के बाद जो भी संभव और उचित कदम होगा, उस दिशा में त्वरित कार्रवाई की जाएगी।