शिवपुरी जिले के नरवर इलाके में बने धुवाई तालाब को गंदे पानी से बचाने के लिए राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) की भोपाल पीठ ने कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने नरवर नगर परिषद को निर्देश दिए हैं कि वे तालाब में गंदा पानी जाने के रास्तों को पूरी तरह से बंद करें और समयसीमा के भीतर सीवेज डायवर्जन की योजना को अमलीजामा पहनाएं। इसके साथ ही 2 एमएलडी क्षमता वाले सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) के निर्माण कार्य को भी तय समय सीमा में पूरा करने के आदेश दिए गए हैं।

न्यायाधिकरण में हुई सुनवाई और समिति का गठन

यह पूरा मामला न्यायमूर्ति श्यो कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य सुधीर कुमार चतुर्वेदी की पीठ के समक्ष 13 अगस्त को सुनवाई के लिए आया था। नवल किशोर भार्गव बनाम मध्यप्रदेश राज्य एवं अन्य के मामले में यह कार्रवाई की गई है। तालाब के संरक्षण और तकनीकी कार्यों की देखरेख के लिए चार सदस्यों की एक विशेष समिति का गठन भी किया गया है। इस समिति में लोक निर्माण विभाग, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, वेटलैंड अथॉरिटी और वाटर वर्क्स विभाग के अनुभवी सिविल व तकनीकी इंजीनियरों को शामिल किया गया है।

चार वार्डों का गंदा पानी पहुंच रहा था तालाब में

जांच के दौरान यह बात सामने आई थी कि नरवर के वार्ड नंबर 7, 8, 11 और 12 का बिना उपचारित घरेलू सीवेज एक नाले के रास्ते सीधे धुवाई तालाब में गिर रहा था। वार्ड नंबर 8 में लंबे समय से सीवेज जमा होने के कारण भूजल के दूषित होने, जहरीली गैसें उठने और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य पर गंभीर खतरा मंडराने की आशंका जताई गई थी। पूर्व में की गई संयुक्त जांच में भी तालाब के पानी में बारिश के जल के साथ गंदे पानी के मिलने की पुष्टि हो चुकी है।

अधिकरण ने स्पष्ट किया है कि गठित की गई तकनीकी समिति आर्द्रभूमि संरक्षण और प्रबंधन नियम, 2017 के प्रावधानों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करेगी। इसके अलावा, नगर परिषद और मुख्य नगर पालिका अधिकारी को यह निर्देश दिए गए हैं कि वे तालाब के जलमग्न क्षेत्र का पक्के मुनारों के जरिए सीमांकन करवाएं। सीमा तय होने के बाद तालाब के चारों तरफ तीन महीने के भीतर स्थानीय और बहुपयोगी पौधे रोपे जाने के भी निर्देश हैं।

पर्यावरण और स्वास्थ्य सुरक्षा को प्राथमिकता

राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को इन सभी आदेशों के अनुपालन पर पैनी नजर रखने को कहा गया है। यदि निर्देशों की अवहेलना होती है, तो जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम, 1974 के प्रावधानों के अंतर्गत कानूनी कार्रवाई की जाएगी। NGT ने यह भी स्पष्ट कर दिया है कि इस आदेश का उद्देश्य किसी की संपत्ति के मालिकाना हक या व्यक्तिगत अधिकारों पर फैसला देना नहीं है, बल्कि इसका मुख्य उद्देश्य धुवाई तालाब को प्रदूषण मुक्त करना, उसकी जल संग्रहण क्षमता को बचाना और नागरिकों को पर्यावरणीय खतरों से सुरक्षित रखना है।