शिवपुरी जिले के बदरवास थाना क्षेत्र अंतर्गत धामनटूक गांव में एक ही दिन दो लोगों की अर्थियां उठने से पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। यहाँ सात साल के पोते की मौत का गहरा सदमा उसकी दादी सहन नहीं कर पाईं और चंद घंटों के भीतर उन्होंने भी दम तोड़ दिया।

इकलौते बेटे की असमय मौत से टूटा परिवार

धामनटूक निवासी परमाल धाकड़ का सात वर्षीय बेटा अंशुल गाँव के ही स्कूल में चौथी कक्षा में शिक्षा ग्रहण कर रहा था। बालक काफी मेधावी था और नवोदय विद्यालय की प्रवेश परीक्षा की तैयारी में जुटा हुआ था। इसी पढ़ाई के सिलसिले में वह कुछ समय से कोलारस में अपनी दादी शांतिबाई के साथ ही रह रहा था।

अचानक बिगड़ी बालक की तबियत और अस्पताल में तोड़ दिया दम

बीते शनिवार की सुबह अचानक अंशुल की तबियत खराब हो गई। दादी शांतिबाई ने तत्काल इस बात की सूचना उसके पिता परमाल को दी। परिजन तुरंत कोलारस पहुँचे और बच्चे को लेकर शिवपुरी के एक निजी अस्पताल गए, जहाँ चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बावजूद परिवार को इस अनहोनी पर यकीन नहीं हुआ और वे जिला अस्पताल पहुँचे, जहाँ भी डॉक्टरों ने मौत की पुष्टि कर दी।

बेटे को खोने का गम परिवार बर्दाश्त नहीं कर पा रहा था। एक रिश्तेदार की सलाह पर परिजन अंतिम प्रयास के रूप में उसे गुना के एक निजी अस्पताल ले जाने लगे। जब वे रास्ते में थे, तभी पोते की हालत से दुखी होकर दादी शांतिबाई की भी तबियत अचानक बहुत बिगड़ गई।

रास्ते में ही दादी ने भी अस्पताल में तोड़ा दम

परिजनों ने तुरंत शांतिबाई को बदरवास स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती कराया और बच्चे को लेकर कुछ लोग गुना रवाना हो गए। गुना पहुँचने पर डॉक्टरों ने अंशुल को मृत ही बताया। जब परिजन बच्चे का शव लेकर वापस लौट रहे थे, तभी उन्हें बदरवास से सूचना मिली कि अस्पताल में भर्ती शांतिबाई का भी निधन हो चुका है।

एक ही परिवार में दादी और पोते की एक साथ हुई इन दोनों मौतों से पूरे गाँव में मातम पसर गया। बाद में दोनों का अंतिम संस्कार एक साथ किया गया, जिसे देखकर हर किसी की आँखें नम हो गईं।