श्योपुर जिले के ढोटी इलाके में सोमवार को खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए पानी की कमी से परेशान किसानों ने जोरदार प्रदर्शन किया। चंबल मुख्य दाहिनी नहर में पानी छोड़ने की मांग को लेकर सुबह 11 बजे से शाम 5 बजे तक, यानी पूरे पांच घंटे तक, सैकड़ों किसान धरने पर बैठे रहे। उन्होंने कोटा बैराज से तुरंत पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने की अपील की।
फसलों पर गहराया संकट
किसान नेता राधेश्याम मीणा मूंड़ला ने बताया कि क्षेत्र में इस बार कम बारिश हुई है और बिजली की कटौती भी लगातार जारी है, जिससे खरीफ की फसलें सूखने की कगार पर हैं। जिन किसानों ने धान की रोपाई कर दी है, उनकी फसलें पानी के अभाव में मुरझा रही हैं। इसके साथ ही, सोयाबीन और अन्य फसलों की बुवाई भी सूखे के कारण बुरी तरह प्रभावित हुई है। किसानों का कहना है कि अगर जल्द पानी नहीं मिला तो उनकी मेहनत बर्बाद हो जाएगी।
प्रशासन पर अनदेखी और भेदभाव का आरोप
किसानों ने प्रशासन पर उनकी समस्याओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उन्होंने याद दिलाया कि 10 जुलाई को भी कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन कर पानी की गुहार लगाई गई थी, लेकिन चंबल मुख्य दाहिनी नहर में अब तक पानी नहीं छोड़ा गया है। किसानों ने यह भी कहा कि गांधी सागर बांध से राजस्थान के बूंदी और कोटा जिलों को पानी मिल चुका है, जबकि श्योपुर के किसान पानी के लिए तरस रहे हैं। इसे किसानों ने अपने साथ सरासर अन्याय और भेदभाव करार दिया।
धरना स्थल पर पहुंचे जल संसाधन विभाग के कार्यपालन यंत्री चैतन्य चौहान ने किसानों को समझाने का प्रयास किया। उन्होंने विभाग द्वारा 10 और 13 जुलाई को कलेक्टर के माध्यम से सरकार को भेजे गए पत्रों को किसानों के सामने प्रस्तुत किया। यंत्री चौहान ने आश्वासन दिया कि नहर में जल्द से जल्द पानी लाने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं।
आंदोलन की गंभीरता को देखते हुए पूर्व विधायक बृजराज सिंह चौहान भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों की समस्याएं सुनीं और तुरंत प्रदेश के सिंचाई मंत्री तुलसी सिलावट तथा जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से फोन पर बात की। पूर्व विधायक ने नहर में तत्काल पानी छोड़ने के लिए दबाव बनाया।
उग्र आंदोलन की चेतावनी
प्रदर्शन के समापन पर किसानों ने एक बार फिर चंबल मुख्य दाहिनी नहर में शीघ्र पानी छोड़ने की मांग दोहराई और कार्यपालन यंत्री को मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन सौंपा। किसान नेता राधेश्याम मीणा ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि कोटा बैराज से पानी तुरंत नहीं छोड़ा गया, तो उनकी फसलें पूरी तरह नष्ट हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि अगर जल्द ही पानी की व्यवस्था नहीं हुई, तो किसान एकजुट होकर चरणबद्ध तरीके से बड़ा आंदोलन शुरू करेंगे, जिसकी पूरी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।






टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!