अंचल के किसानों की सिंचाई समस्याओं को लेकर मंगलवार को बड़ौदा इलाके में जोरदार विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। चंबल मुख्य दाहिनी नहर में जलप्रवाह बहाल करने की मांग को लेकर बड़ी संख्या में अन्नदाता सड़कों पर उतर आए और श्योपुर-बारां हाईवे को जाम कर दिया।

सिंचाई के अभाव में संकट में पड़ी धान की फसल

यह पूरा विरोध प्रदर्शन किसान नेता राधेश्याम मीणा मूंडला के नेतृत्व में चंबल नहर के मूंडला पॉइंट के पास आयोजित किया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि पूर्व में हुए आंदोलनों के बाद नहर में पानी छोड़ा जरूर गया था, जिसे बाद में बंद कर दिया गया। इस समय खेतों में खड़ी धान की फसल को पानी की बेहद आवश्यकता है और सिंचाई साधन न मिलने से फसलें सूखने के कगार पर पहुंच गई हैं।

नहर के अंतिम छोर तक पानी पहुंचाने की मांग

किसानों ने मांग उठाई है कि मुख्य नहर में कम से कम 3200 क्यूसेक पानी छोड़ा जाए। साथ ही इसकी सभी उपशाखाओं, माइनरों और वितरिकाओं में भी सुचारू रूप से जल आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, ताकि पानी नहर के अंतिम छोर तक बैठे हर एक किसान के खेत तक पहुंच सके।

प्रदर्शन के दौरान प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर बुलाया गया। बड़ौदा के नायब तहसीलदार शैलेंद्र देव सिंह सेंगर और सिंचाई विभाग के एसडीओ शुभम अग्रवाल को मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन सौंपा गया, जिसमें जिले के हिस्से का पानी प्राथमिकता के आधार पर वितरित करने की गुहार लगाई गई है।

प्रशासन को मिला तीन दिन का अल्टीमेटम

यदि तीन दिन के भीतर कोटा बैराज से पानी छोड़कर नहर को पूरी क्षमता से चालू नहीं किया गया, तो किसान महापड़ाव डालकर पक्का और अनिश्चितकालीन चक्का जाम करने के लिए बाध्य होंगे।

किसान नेताओं ने स्पष्ट शब्दों में चेतावनी दी है कि फसल बचाने के लिए उनका संघर्ष तब तक जारी रहेगा जब तक मांग पूरी नहीं होती।