280 करोड़ की लागत पर उठे सवाल, पहली बारिश में खुली पोल

श्योपुर में 280 करोड़ रुपए की लागत से तैयार मेडिकल कॉलेज का नया भवन निर्माण एजेंसी 'ब्रिज एंड रूफ' की लापरवाही के चलते भ्रष्टाचार का अखाड़ा बनता नजर आ रहा है। कागजों में प्रोजेक्ट को पूरा दिखाकर एजेंसी ने करीब 20 करोड़ रुपए का काम अधूरा छोड़ दिया है। स्थिति यह है कि मानसून की पहली ही बारिश में घटिया निर्माण की पोल खुल गई है, जिससे इमारत जमीन में धंसने लगी है, दीवारों में बड़ी दरारें आ चुकी हैं और छतें टपकने लगी हैं।

कमियां उजागर करने पर तत्कालीन डीन पर गिरी गाज

इस पूरे मामले में हैरानी की बात यह है कि जब तत्कालीन डीन डॉ. अनिल अग्रवाल ने कॉलेज भवन की 14 प्रमुख कमियों की जांच रिपोर्ट तैयार कर इसका हैंडओवर लेने से साफ इनकार कर दिया, तो शासन स्तर पर दोषियों पर कार्रवाई करने के बजाय डीन को ही उनके पद से हटा दिया गया। इसके तुरंत बाद आनन-फानन में नए डीन की नियुक्ति की गई और बिना किसी सुधार कार्य के इस अधूरे भवन का हैंडओवर भी ले लिया गया।

जांच में गायब मिले हॉस्टल और जरूरी उपकरण

प्रोजेक्ट की डीपीआर और जांच समिति की रिपोर्ट के अनुसार, निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं बरती गई हैं। तय योजना के मुताबिक दो पूरे हॉस्टल का निर्माण किया ही नहीं गया, जबकि सीनियर रेजिडेंट्स और नर्सिंग स्टाफ के आवासों को केवल नींव यानी प्लिंथ स्तर तक बनाकर छोड़ दिया गया। इसके अलावा क्लासरूम में एसी और माइक खराब पड़े मिले। मौके पर 50 सीमेंट बेंच, तीन डीजी सेट की जगह सिर्फ दो और छह बोरिंग की जगह महज तीन बोरिंग ही पाए गए, जिनमें से एक में मोटर तक नहीं डाली गई है।

कॉलेज भवन में दो हॉस्टल नहीं बने हैं। मैंने वरिष्ठों को जानकारी भेज दी थी। करीब 20 करोड़ के काम नहीं हुए थे। जिनको डीन का प्रभार सौंपा गया, वह काफी जूनियर हैं। - डॉ. अनिल अग्रवाल, पूर्व डीन

नए डीन ने दी सफाई, मंत्रालय को भेजे गए पत्र

पूर्व डीन डॉ. अनिल अग्रवाल का कहना है कि उन्होंने अधूरा काम देखकर चार्ज लेने से मना किया था, जिसके बाद उनका ट्रांसफर कर दिया गया। वहीं, वर्तमान डीन डॉ. विपेंद्र भदकारिया का कहना है कि उन्हें पुराने डीन को हटाने के कारणों की जानकारी नहीं है, लेकिन छात्रों की कक्षाएं शुरू कराने के लिए पीआईयू और बिजली विभाग की अनुशंसा पर भवन का हैंडओवर लेना पड़ा। उन्होंने दावा किया कि पुरानी समिति की सभी आपत्तियों को लेकर डीएमई और मंत्रालय को पत्र भेजे जा चुके हैं।