मुरैना जिले में इस वर्ष मानसून की रफ्तार धीमी बनी हुई है। 1 जून से 6 जुलाई 2026 तक की अवधि में जिले में औसतन 92.2 मिलीमीटर वर्षा रिकॉर्ड की गई है। यह आंकड़ा पिछले साल की इसी समय सीमा के 318.4 मिलीमीटर की तुलना में 226.2 मिलीमीटर कम है, जो किसानों के लिए चिंता का विषय है।
तहसीलों में वर्षा का असमान वितरण
भू-संसाधन प्रबंधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, जिले में वर्षा का वितरण भी काफी असमान रहा है। इस अवधि में जौरा तहसील में सर्वाधिक 192 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई, जबकि अंबाह में सबसे कम 44.5 मिलीमीटर वर्षा हुई।
अन्य तहसीलों की बात करें तो कैलारस में 127 मिलीमीटर, पोरसा में 72.5 मिलीमीटर, सबलगढ़ में 60 मिलीमीटर और मुरैना तहसील में 57 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई है।
6 जुलाई को मुरैना में सर्वाधिक वर्षा
सोमवार, 6 जुलाई को जिले में हुई वर्षा में मुरैना तहसील सबसे आगे रही, जहां 19 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसी दिन सबलगढ़ में 10 मिलीमीटर, पोरसा और कैलारस में 6-6 मिलीमीटर तथा अंबाह में 0.5 मिलीमीटर वर्षा हुई। हालांकि, जौरा में इस दिन कोई बारिश रिकॉर्ड नहीं की गई।
किसानों को अच्छी बारिश का इंतजार
जिले के किसान अब भी अच्छी बारिश का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं, ताकि खरीफ फसलों की बुवाई और उनकी बढ़वार के लिए पर्याप्त पानी मिल सके। कृषि अनुसंधान केंद्र के वैज्ञानिक संदीप तोमर ने बताया कि आगामी दिनों में मानसून की सक्रियता ही जिले की कृषि और खरीफ फसलों के भविष्य को तय करेगी।
उन्होंने यह भी कहा कि आगे चलकर बारिश तो होगी, लेकिन पिछले वर्ष की तुलना में कुल वर्षा कम रहने की संभावना है, जिससे किसानों की चिंताएं बढ़ गई हैं।





टिप्पणियाँ 2
बहुत बढ़िया और संतुलित रिपोर्टिंग। ग्वालियर चंबल टाइम्स पर भरोसा बना रहता है।
अंचल की खबरें इतनी डिटेल में और कहीं नहीं मिलतीं। शुक्रिया!