ग्वालियर-चंबल अंचल के किसानों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। प्रदेश सरकार के कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना ने स्पष्ट किया है कि लंबे समय से बंद चली आ रही कैलारस शक्कर मिल को एक बार फिर से चालू कराया जाएगा। इस सिलसिले में कृषि मंत्रालय की तरफ से आधिकारिक पत्र भी जारी कर दिया गया है, जिससे क्षेत्र में उम्मीदें जाग गई हैं।

एमएसएमई विभाग को सौंपी गई मिल की जमीन

मंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि इस शक्कर कारखाने की जमीन को पहले ही सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) विभाग को हस्तांतरित किया जा चुका है। सरकार की मंशा है कि इस भूमि का उपयोग कर मिल को सुचारू रूप से संचालित किया जाए। इसके लिए विभाग अब देश के बड़े शक्कर मिल संचालकों से इस कारखाने को चलाने के वास्ते विधिवत प्रस्ताव मांगेगा।

विधायक का अनशन और किसानों की समस्याएं

उल्लेखनीय है कि इस कारखाने को पुनः शुरू कराने की मांग को लेकर जौरा के विधायक पंकज उपाध्याय पिछले 15 अगस्त से अनशन पर बैठे हुए हैं। उनका यह विरोध प्रदर्शन और अनशन छठवें दिन भी बिना रुके जारी रहा। कैलारस शक्कर मिल पिछले लगभग 13 वर्षों से पूरी तरह बंद पड़ी है, जिसके कारण स्थानीय गन्ना उत्पादक किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है और उन्हें अन्य स्थानों पर आश्रित रहना पड़ता है।

यह कारखाना यदि दोबारा शुरू हो जाता है, तो इससे क्षेत्र के बीस हजार से अधिक स्थानीय गन्ना किसानों को सीधा आर्थिक फायदा पहुंचेगा। इसके साथ ही इस क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं के लिए रोजगार के नए रास्ते भी खुलेंगे।

औद्योगिक क्लस्टर बनाने की भी है योजना

सरकार की तरफ से जारी किए गए दस्तावेजों के अनुसार, मंत्रिपरिषद ने 19 अगस्त को ही इस कारखाने की जमीन को एमएसएमई विभाग को सौंपने का निर्णय लिया था। मुख्यमंत्री के स्पष्ट निर्देशों के बाद यह कदम उठाया गया है। इसके अलावा कृषि विभाग द्वारा अंचल में गन्ने की पैदावार और खेती को बढ़ाने के लिए भी विशेष प्रयास किए जाएंगे।

प्रशासन अब ईओआई यानी एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट जारी करने की प्रक्रिया पर काम कर रहा है, जिसके माध्यम से अनुभवी मिल संचालकों को आमंत्रित किया जाएगा। खास बात यह है कि मिल के लिए जरूरी जमीन को अलग रखने के बाद जो शेष भूमि बचेगी, वहां एक नया औद्योगिक क्लस्टर विकसित करने की योजना भी बनाई गई है, जिससे इलाके में अन्य उद्योग भी स्थापित हो सकें।